सरस्वती ओमँ शान्ती
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#📿संतवाणी 🗣️ *स्वमान – 14 अगस्त, 2026*
🧘 *मैं एकरस आत्मा हूँ*
🌹 *आजकल एक-दो में जो लगाव है, वह स्नेह से नहीं लेकिन स्वार्थ से है। स्वार्थ के कारण लगाव है और लगाव के कारण न्यारे नहीं बन सकते, इसलिए स्वार्थ शब्द के अर्थ में स्थित हो जाओ अर्थात् पहले स्व के रथ को स्वाहा करो। यह स्वार्थ गया तो न्यारे बन ही जायेंगे। इस एक शब्द के अर्थ को जानने से सदा एक के और एकरस बन जायेंगे....यही सहज पुरुषार्थ है*।🌹
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