ITIHAAS KE PANNON SE
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🇮🇳 महावीर सिंह राठौर — कालापानी में दिया ऐसा बलिदान, जिसे भूलना नहीं चाहिए 1933 में अंडमान की सेल्युलर जेल में राजनीतिक कैदियों ने जेल की अमानवीय परिस्थितियों और कैदियों के साथ हो रहे व्यवहार के विरोध में भूख हड़ताल शुरू की। इस संघर्ष में क्रांतिकारी महावीर सिंह राठौर भी शामिल थे। वे 1929 के लाहौर षड्यंत्र केस में आजीवन कारावास की सजा पाए थे और जनवरी 1933 में उन्हें अंडमान की सेल्युलर जेल भेजा गया था। � Amrit Mahotsav भूख हड़ताल के दौरान अंग्रेजी जेल प्रशासन ने कैदियों को जबरन खाना खिलाने की कोशिश की। 17 मई 1933 को महावीर सिंह को जबरन दूध पिलाने के लिए नली डाली गई। सरकारी विवरण के अनुसार दूध उनके फेफड़ों में चला गया और उनकी मृत्यु हो गई। � Amrit Mahotsav +1 उनका बलिदान अंडमान की उस जेल में राजनीतिक कैदियों के अधिकारों और सम्मान के लिए किए गए संघर्ष का एक बेहद दर्दनाक अध्याय बन गया। 🙏 अमर शहीद महावीर सिंह राठौर को शत-शत नमन। 💬 क्या आपने महावीर सिंह राठौर के बारे में पहले कभी पढ़ा था? अगर नहीं, तो कमेंट में “पहली बार जाना” लिखिए। — इतिहास के पन्नों से #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #😇 चाणक्य नीति
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