sn vyas
#राधे कृष्ण
॥ विजयते् श्रीबालकृष्ण प्रभु ॥
मेरे प्रियवर...
मेरे प्रियवर मेरे भगवन
बस एक यही पुकार है
जिह्वा तेरा नाम उचारे
और नही कोई नाम ले..
दृष्टि तुझ पर टिकी रहे प्रभु
सांसे जब प्रस्थान करें
भाव तनिक ना विचलित हो
काल की जब पुकार लगे..
मैं पापी तू दयामय प्रभु
यह अर्ज मेरी स्वीकार ले
अंत समय जब आए प्रभु
तेरा सुमिरन ध्यान रहे..
अंत समय अब निकट आ रहा
श्वास श्वास तेरा नाम रटे
रुखसत हो जब जीव जगत से
प्रभु सर पर तेरा हाथ रहे...
मेरी दृष्टि की अंतिम ज्योति
तेरा अंतिम रूप निहार ले
मेरी आंखों का अंतिम अश्रु
प्रभु तेरे चरण पखार ले..
जो प्रभु को ही सर्वत्र देखता है, महसूस करता है,
उसे प्रभु की माया स्पर्श नहीं करती।
माया स्वयं का विस्मरण है…माया अज्ञान है, माया परमात्मा से भिन्न… माया नर्तकी है… नाचती है… नचाती है…!
लेकिन जो श्रीकृष्ण से जुड़ा है, वह नाचता नहीं…भ्रमित नहीं होता…
माया से निर्लेप रहता है, वह जान जाता है, जो जान गया वह श्रीकृष्ण से अलग कैसे रह सकता है ...!!
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