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yash pande - Author on ShareChat
yash pande
606 views • 1 days ago
#motivation
रास्ते पर कंकड़ ही कंकड़ हो, तो भी एक अच्छा जूता पहनकर उस पर चला जा सकता है लेकिन यदि एक अच्छे जूते के अंदर एक भी कंकड़ हो तो, एक अच्छी सड़क पर भी॰ कुछ कदम भी चलना मुश्किल हे। यानी.... बाहर की से नहीं चुनौतियों  हम अपनी अंदर की कमजोरियों से हारते है। रास्ते पर कंकड़ ही कंकड़ हो, तो भी एक अच्छा जूता पहनकर उस पर चला जा सकता है लेकिन यदि एक अच्छे जूते के अंदर एक भी कंकड़ हो तो, एक अच्छी सड़क पर भी॰ कुछ कदम भी चलना मुश्किल हे। यानी.... बाहर की से नहीं चुनौतियों  हम अपनी अंदर की कमजोरियों से हारते है।
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  • Royal jaat fitness - Author on ShareChat
    Royal jaat fitness
    #motivation #jai baba ki
    motivation, jai baba ki
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  • Priti Rani - Author on ShareChat
    Priti Rani
    #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #motivation #☝ मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख
    RADHA KRISHNA "वक्त चाहे कितना भी खराब चल रहा हो, लोग साथ छोड़ सकते हैं पर भरोसा आज भी सिर्फ आप पर ही है" !!79!! motivational pritirani RADHA KRISHNA "वक्त चाहे कितना भी खराब चल रहा हो, लोग साथ छोड़ सकते हैं पर भरोसा आज भी सिर्फ आप पर ही है" !!79!! motivational pritirani
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  • PositiveVibesDaily. - Author on ShareChat
    PositiveVibesDaily.86
    समय और हालात हमेशा बदलते रहते हैं ⏳ | धैर्य रखो, मंज़िल जरूर मिलेगी | #motivation #trending #life #Education #sharechat
    समय और हालात हमेशा बदलते रहते हैं ⏳ | धैर्य रखो, मंज़िल जरूर मिलेगी |, motivation
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  • yash pande - Author on ShareChat
    yash pande
    #motivation
    मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है उसके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उसका  अकेलापन नहीं, बल्कि उसके रिश्ते होते हैं माँ बाप, भाईन्बहन, दोस्त, हमसफ़र, पड़ोसी, और समाज। लेकिन जब यही रिश्ते कहीं टूट जाते हैं या कभी बन ही नहीं पाते, तो मन के भीतर एक गहरा खालीपन पनपने लगता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है उसके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उसका  अकेलापन नहीं, बल्कि उसके रिश्ते होते हैं माँ बाप, भाईन्बहन, दोस्त, हमसफ़र, पड़ोसी, और समाज। लेकिन जब यही रिश्ते कहीं टूट जाते हैं या कभी बन ही नहीं पाते, तो मन के भीतर एक गहरा खालीपन पनपने लगता है।
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  • yash pande - Author on ShareChat
    yash pande
    #motivation
    मनुष्य उन्हीं चीज़ों का विरोध करता है, जिन्हें उसने स्वयं कभी जिया नहीं होता। जिसने दुनिया की सैर की हो, वो घूमने को आवारगी नहीं कहेगा। जिसने प्रेम को जिया हो, वह प्रेम करने से किसी को नहीं रोकेगा | समस्या कर्मों में नहीं होती, अधूरे जीवनों में होती है समस्या उन अनुभवों से पहले ही निर्णय सुना देते हैं। मनुष्य अक्सर उसी को गलत कहता है, जिसे वह स्वयं कभी जी नहीं पाया। कई बार विरोध नैतिकता से नहीं, अधूरेपन से जन्म लेता है। मनुष्य उन्हीं चीज़ों का विरोध करता है, जिन्हें उसने स्वयं कभी जिया नहीं होता। जिसने दुनिया की सैर की हो, वो घूमने को आवारगी नहीं कहेगा। जिसने प्रेम को जिया हो, वह प्रेम करने से किसी को नहीं रोकेगा | समस्या कर्मों में नहीं होती, अधूरे जीवनों में होती है समस्या उन अनुभवों से पहले ही निर्णय सुना देते हैं। मनुष्य अक्सर उसी को गलत कहता है, जिसे वह स्वयं कभी जी नहीं पाया। कई बार विरोध नैतिकता से नहीं, अधूरेपन से जन्म लेता है।
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  • Divya, yuvraj singh rajput - Author on ShareChat
    Divya, yuvraj singh rajput
    #motivation sunrise 🌄 good morning 🌹
    ood [@tutug बादलो को हटाकर सुरज अपना रास्ता बना हि लेता 8 वैसे ही कितना भी दुखों का अंधेरा बादल हो सुबह होने से नही रोक सकता ood [@tutug बादलो को हटाकर सुरज अपना रास्ता बना हि लेता 8 वैसे ही कितना भी दुखों का अंधेरा बादल हो सुबह होने से नही रोक सकता
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  • SATISH PANDE - Author on ShareChat
    SATISH PANDE
    #motivation
    बेगाने होते लोग देखे, अजनबी होता शहर देखा। हर इंसान को यहाँ , मैंने खुद से ही बेखबर देखा। रोते हुए नयन देखे, मुस्कुराता हुआ अधर देखा। गैरों के हाथों में मरहम, अपनों के हाथों में खंजर देखा। मत पूछ इस जिंदगी में , इन आँखों ने क्या मंजर देखा | मैंने हर इंसान को यहाँ, बस खुद से ही बेखबर देखा। बेगाने होते लोग देखे, अजनबी होता शहर देखा। हर इंसान को यहाँ , मैंने खुद से ही बेखबर देखा। रोते हुए नयन देखे, मुस्कुराता हुआ अधर देखा। गैरों के हाथों में मरहम, अपनों के हाथों में खंजर देखा। मत पूछ इस जिंदगी में , इन आँखों ने क्या मंजर देखा | मैंने हर इंसान को यहाँ, बस खुद से ही बेखबर देखा।
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  • yash pande - Author on ShareChat
    yash pande
    #motivation
    मिलने आई थी आज ज़िंदगी मुझसे मेरी शिकायतें सुनीं , फिर मुस्कुराकर बोली जिस दिन तुम्हारी हर चाह पूरी हो जाएगी, दिन तुम मुझसे नहीं , ख़ुद से ऊब जाओगे शायद उस कुछ अधूरे ख़्वाब भी ज़रूरी हैं, ताकि सफ़र बचा रहे शिकायत करने से पहले कभी ग़ौर करना तुम्हें मेरी कमी है, या अपनी अधूरी ख़्वाहिशों का मलाल? इतना कहकर वो चली गई और मैं देर #@కెT కI तक अपने ही सवालों के कटघरे मिलने आई थी आज ज़िंदगी मुझसे मेरी शिकायतें सुनीं , फिर मुस्कुराकर बोली जिस दिन तुम्हारी हर चाह पूरी हो जाएगी, दिन तुम मुझसे नहीं , ख़ुद से ऊब जाओगे शायद उस कुछ अधूरे ख़्वाब भी ज़रूरी हैं, ताकि सफ़र बचा रहे शिकायत करने से पहले कभी ग़ौर करना तुम्हें मेरी कमी है, या अपनी अधूरी ख़्वाहिशों का मलाल? इतना कहकर वो चली गई और मैं देर #@కెT కI तक अपने ही सवालों के कटघरे
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  • SATISH PANDE - Author on ShareChat
    SATISH PANDE
    #motivation
    परखना मत परखना मत लोगों को, परखने में कोई अपना नहीं रहता। रिश्ते तराज़ू से नहीं, विश्वास से निभाए जाते हैं। होती है, हर चेहरे के पीछे एक कहानी हर मुस्कान के पीछे एक दर्द छिपा होता है। जो हर  पल कसौटी पर कसे जाएँ, वे भी एक दिन थककर दूर हो जाते हैं। कमियाँ तो हर इंसान में होती हैं, पूर्ण यहाँ कोई नहीं होता। विश्वास, थोड़ा अपनापन, थोड़ा यही हर रिश्ते का सबसे बड़ा धन होता। इसलिए दिल से बस इतना कहना है "परखना मत लोगों को, परखने में कोई अपना नहीं रहता। बस यही कल्पना की सोच है।" परखना मत परखना मत लोगों को, परखने में कोई अपना नहीं रहता। रिश्ते तराज़ू से नहीं, विश्वास से निभाए जाते हैं। होती है, हर चेहरे के पीछे एक कहानी हर मुस्कान के पीछे एक दर्द छिपा होता है। जो हर  पल कसौटी पर कसे जाएँ, वे भी एक दिन थककर दूर हो जाते हैं। कमियाँ तो हर इंसान में होती हैं, पूर्ण यहाँ कोई नहीं होता। विश्वास, थोड़ा अपनापन, थोड़ा यही हर रिश्ते का सबसे बड़ा धन होता। इसलिए दिल से बस इतना कहना है "परखना मत लोगों को, परखने में कोई अपना नहीं रहता। बस यही कल्पना की सोच है।"
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  • yash pande - Author on ShareChat
    yash pande
    #motivation
    अकेलापन हमेशा खाली कमरे में नहीं मिलता... कभी-कभी पूरा घर साथ होता है, फिर भी दिल में एक अजीब-सी ख़ामोशी होती है। क्योंकि अपनों की पहचान साथ बैठने से नहीं , साथ निभाने से होती है। अगर आपके मन की बात सुनने वाला भी खुद  कोई नहीं, तो को कमज़ोर मत समझिए। कई बार सुकून भीड़ में नहीं , सही इंसानों के साथ मिलता है। अकेलापन हमेशा खाली कमरे में नहीं मिलता... कभी-कभी पूरा घर साथ होता है, फिर भी दिल में एक अजीब-सी ख़ामोशी होती है। क्योंकि अपनों की पहचान साथ बैठने से नहीं , साथ निभाने से होती है। अगर आपके मन की बात सुनने वाला भी खुद  कोई नहीं, तो को कमज़ोर मत समझिए। कई बार सुकून भीड़ में नहीं , सही इंसानों के साथ मिलता है।
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