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#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🎞️आज के वायरल अपडेट्स बदलते मौसम और वातावरण में बढ़ी उमस के चलते जुकाम, खांसी, बुखार जैसी समस्याएं इन दिनों स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं, लेकिन ये समस्याएं लगातार बनी रहें या आसपास अधिक दिखने लगें, तो ये फ्लू के भी लक्षण हो सकते हैं।
दिल्ली-एनसीआर में बीते कुछ दिनों में स्वाइन फ्लू के 1700 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। दरअसल, स्वाइन फ्लू एच1एन1 वायरस के संक्रमण के कारण होता है, इसके शुरुआती लक्षणों में सर्दी-जुकाम ही सबसे आम है, लेकिन डॉक्टर चेताते हैं कि ये कभी भी गंभीर रूप ले सकते हैं।
ऐसे में स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्क और इसके फैलाव को रोकने के लिए हर किसी को जागरूक होने की जरूरत है, ताकि मुसीबत को आने से पहले रोका जा सके। एच1एन1 वायरस से घबराने के बजाय घरों, स्कूलों, कार्यालयों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर थोड़ी सतर्कता बढ़ाने जैसे मास्क पहनने, स्वच्छता का ध्यान रखने की जरूरत होती है।
एच1एन1 वायरस के प्रभाव को समझें
यह इन्फ्लुएंजा-ए वायरस होता है, जिसका सबसे आम लक्षण श्वसन (रेस्पिरेटरी) संक्रमण होता है। डब्ल्यूएचओ ने इस वायरस को 2009 में महामारी के रूप में घोषित किया था। यह अनेक देशों में फैला था, बाद में यह नियंत्रित तो हो गया, पर नए रूपों में इसकी मौजूदगी बनी हुई है।
इसका जोखिम भी कम हुआ है, इसे अब सीजनल इन्फ्लुएंजा स्ट्रेन माना जाता है। इस बार देश के कुछ हिस्सों में स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी देखी जा रही है। इसमें अचानक बुखार आने, कफ की समस्या, शरीर और सिर में दर्द, ठंड लगने और अधिक थकान जैसी समस्याएं होती हैं। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर एच1एन1 संक्रमण को कन्फर्म नहीं किया जा सकता है। इसके लिए जांच की आवश्यकता होती है।
क्यों फैल रहा है संक्रमण
बंद कमरे में अधिक लोगों के होने, सही वेंटिलेशन नहीं होने और अधिक भीड़ होने की स्थिति में इसका जोखिम बढ़ जाता है। मौसम में हो रहे बदलाव की भी इसमें भूमिका होती है। वीएमएमसी, सफदरजंग अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. योगेश पोरवाल बताते हैं कि जिस तरह हम कोविड के दौरान सतर्कता बरत रहे थे, वैसे ही फ्लू के मामले में भी थोड़ा सावधान रहना चाहिए। लोगों से हाथ मिलने, भीड़ में जाने, खांसने, छींकने के दौरान सतर्क रहने की जरूरत है।
डॉ. पोरवाल कहते हैं कि खांसने या छींकने से जो ड्रॉपलेट्स गिरते हैं, उनके हवा में जाने से संक्रमण की आशंका बढ़ती है। उदाहरण के तौर पर आपके आसपास किसी व्यक्ति को छींक या खांसी आई और वह व्यक्ति अपने हाथों से किसी सामान को छुआ या दरवाजे का हैंडल पकड़ा, तो वहां वायरस आ जाता है।
जब इनके संपर्क में कोई अन्य व्यक्ति आता है, तो वह संक्रमित हो सकता है। संक्रमित होने पर सर्दी जुकाम, बुखार जैसे लक्षण आते हैं और सबसे खास बात है कि ज्यादातर लोग दो से तीन दिनों में बिना इलाज के ठीक भी हो जाते हैं। कुछ लोगों में लक्षणों की गंभीरता बढ़ जाती है, जिन्हें इलाज या अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत होती है।
ऐसे लोगों को है अधिक खतरा
जिन्हें पहले से स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या है, जैसे डायबिटीज या हाइपरटेंशन या अस्थमा आदि।
जो हृदय रोग से ग्रसित हैं या किसी तरह के इम्युनोसप्रेशन दवाओं का सेवन कर रहे हैं।
जिनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक हो चुकी है। साथ ही मोटापे से ग्रसित लोगों, गर्भवती महिलाओं और कम उम्र के बच्चों को लेकर भी सतर्कता रहने की जरूरत होती है।
फ्लू होने पर क्या करें
अगर सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार जैसे लक्षण हो रहे हैं, तो स्वच्छता का विशेष तौर पर खयाल रखना चाहिए, ताकि आपकी वजह से दूसरों को संक्रमण न हो।
फ्लू के लक्षण होने पर घर में ही आराम करना चाहिए, भीड़ में जाने से बचना चाहिए।
खांसी, सर्दी, जुकाम होने पर एक रूमाल का इस्तेमाल करें।
छींकते समय मुंह पर रूमाल लगाएं, ताकि ड्रॉपलेट्स न फैले।
बाहर निकलते समय फेस मास्क का प्रयोग करें और हाथों को धोते रहें।
बुजुर्गों, बच्चों, क्रोनिक हेल्थ समस्याओं का सामना कर रहे लोगों, गर्भवती महिलाओं को डाक्टर से परामर्श कर फ्लू वैक्सीन लगवानी चाहिए।
वैक्सीन लगवाने का मतलब यह नहीं है कि फ्लू होगा ही नहीं, इसका लाभ यही है कि फ्लू होने पर बीमारी के गंभीर होने का खतरा कम रहेगा
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