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- -#भक्ति भाव1524
- sn vyas#जय श्री कृष्ण #भक्ति भावना श्लोक : नो किं समंजसमिहेत्यसमंजसं वा, वेदेति गूढसरणीं कलयामि किंचित्। एतेन सर्वफलनं भवतां न वा यद्, गोविन्दपादभजनादितरं न जाने।। अर्थात् :- वेद में क्या विधि है क्या निषेध है—यह जान लेना अत्यन्त मुश्किल है, जैसा कि श्रीमद्भागवत में कहा है—“शब्दब्रह्म सुदुर्बोधम्” इत्यादि “प्राण, इन्द्रिय तथा मनोमय होने के कारण, शब्दब्रह्मस्वरूप वेद, अत्यन्त दुर्बोध है” आदि । इसलिए मैं विधि-निषेध को छोड़कर वेदार्थ-सार का विचार करते हुए यही जान पाया हूँ कि गोविन्द के श्रीचरणों का सेवन करने के अतिरिक्त अन्य कुछ भी श्रेय नहीं है। समस्त श्रुतियों (वेदों) का तात्पर्य इसी विचार में सम्मिलित है। श्लोक : निन्दापरा बन्धुवरा बुधानां, तत्वेन जानन्तु त एव धीराः। जातं मलं दैववशाद्यतस्ते, स्वेनापकर्षन्ति रसेन्द्रियेण॥ अर्थात् :- जो वेदार्थ-सार का विचार नहीं करते और मात्र निन्दा-स्तुति में प्रवृत्त रहते हैं, धीर-पुरुष, निन्दकों की इस प्रवृत्ति से विचलित न होकर, तात्त्विक दृष्टि से उनको अपने श्रेष्ठ बन्धु की ही भाँति प्रेम करते हैं, क्योंकि कर्म-विपाक से यदि कभी कोई पाप-कर्म इस देह से बन जाता है तो उसे ये निन्दक लोग अपनी जिह्वा से धो डालते हैं, तथा धीरपुरुष इनके द्वारा आत्म-दर्शन करने में समर्थ होते हैं। भो ! निन्दका ! भो ! बहुतर्कवादाः, शृण्वन्त्वसूयारसिकास्तवेदम्। शूरा भवन्तः स्वरणे वयं तु, स्वे कृष्ण-भावे किमु कातराः स्मः॥ अर्थात् :- हे निन्दको ! तार्किको ! और ईर्ष्यालु जनो ! आप सब भली भाँति सुन लें कि जिस प्रकार आप लोग निन्दा, तर्क और असूया करने में शूर हैं, उसी प्रकार हम भी अपने श्रीश्यामसुन्दर के भाव में दृढ़ हैं, कायर नहीं। श्लोक : मां दम्भिनो दम्भयुतं वदन्तु, प्रमत्तचित्ता धनिनश्च मत्तम्। प्रलोभिनः कर्मरताश्च लुब्धं, यथाकथञ्चिद्गतिरस्तु कृष्णः॥ अर्थात् :- दम्भी लोग मुझे भले ही दम्भी बतलावें, अस्थिर मन वाले धनी लोग मुझे भले ही मत्त कहें, अथवा कर्मरत लोभी जन भले ही मुझे लुब्धक समझें। इन सब लोक-धारणाओं से मुझे कुछ लेना-देना नहीं, मैं तो केवल यही चाहता हूँ कि जिस किसी प्रकार से भी श्रीकृष्ण ही मेरे आश्रय हों। श्लोक : चेदर्थहानिर्मम नापरस्य हा किं विवादं जनता विधत्ते। स्वधर्ममुद्दूष्य हरि भजतो, धर्मस्य हानिर्ज्वलतात् स धर्मः।। अर्थात् :- वर्ण और आश्रम-धर्मों को महत्त्व न देकर हरि-भजन करते हुए यदि धन-कुटुम्ब का विनाश होता है तो यह मेरे अपने सोचने की बात है, और लोगों का इस विषय में विवाद करना व्यर्थ है। कहा जाता है कि हरि-भजन से वर्णाश्रम-धर्मों की हानि होती है, तो मैं कहूंगा कि भजन ही सर्वोपरि धर्म है, भजन-विरोधी तथा-कथित ऐसे धर्म का भस्म हो जाना ही अच्छा है। ।। जय श्रीकृष्ण ।। .1523
- Abhi Babu.#भक्ति भावना #जय बजरंगबली #😇मंगलवार भक्ति स्पेशल🌟 #जय हनुमान #जय श्रीराम 🚩🚩1723
- -#भक्ति भाव2630
- -#भक्ति भाव1117
- राकेश कुमार#####🕉️🔱🙏ॐ नमः शिवाय 🕉️🔱🙏 #☆࿐ཽ༵༆༒जय महाकाल༒༆࿐ཽ༵☆ #🙏🌺हर हर🔱महादेव🌺🙏 #भक्ति #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स217187
- sn vyas#जय हनुमान #जय श्री राम #भक्ति भावना हनुमान जी के सिंदूर का प्रयोग कर गुस्से और जिद पर काबू पायें 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ हर माता – पिता की यही प्रयास करते हैं कि वो अपने बच्चों को अच्छी परवरिश तथा अच्छा जीवन दें. जिसके लिए वो अपने बच्चों की हर इच्छा को पूर्ण कर देते हैं. लेकिन कभी – कभी बच्चों के द्वारा कुछ ऐसी वस्तुओं की मांग की जाती हैं. जिनको पूरा कर पाना उनके माता – पिता के लिए असंभव हो जाता हैं. ऐसी स्थिति में कुछ बच्चे अपने माता – पिता से गुस्सा हो जाते हैं और अपनी मांग की पूर्ति हेतु जिद्द करते हैं. अगर इसके बाद लगातार बच्चों की बातों को माता – पिता नजरअंदाज करने लगते हैं तो गुस्सा और जिद्द उनके व्यवहार में निहित हो जाता हैं. जिसके बुरे परिणाम का भी कई बार बच्चों के साथ – साथ उनके माता – पिता को सामना करना पड़ता हैं. यदि आपका बच्चा भी जिद्दी हैं और उसे जल्द ही गुस्सा आ जाता हैं. तो नीचे दिए गये उपायों का प्रयोग जरूर करें. हनुमान चालीसा एक चमत्कारी रामबाण उपाय ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 1.कभी – कभी बच्चे अपनी छोटी – छोटी बातों को मनवाने के लिए जिद्द करने लग जाते हैं. जिससे जिद्द करना उनकी आदत बन जाती हैं. अपने बच्चे की जिद्द करने की प्रवृति को कम करवाने के लिए आप पहले तो बच्चों को आराम से प्यार से समझाएं. अगर वो इसके बाद भी न माने तो नीचे अगला प्रयोग आजमायें। गुस्से और जिद्द पर काबू कैसे पायें ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 2.शास्त्रों के अनुसार यदि कोई बच्चा बहुत ज्यादा जिद्दी हो, छोटी – छोटी बातों पर गुस्सा हो जाता हो, माता – पिता की बात बिल्कुल न सुनता हो, जिद्द के कारण ही जमीन पर लेट जाता हो, चिडचिडापन उसके व्यवहार की मुख्य प्रवृति बन गई हो. तो इसके लिए किसी प्रतिष्ठित हनुमान जी के मंदिर में शनिवार और मंगलवार को जाएँ और उनके बायें पैर का सिंदूर लेकर उसके माथे पर लागायें. हर मंगलवार और शनिवार के दिन इस प्रयोग को करने से आपका बच्चा जिद्द करना और गुस्सा करना बिल्कुल छोड़ देगा. हनुमान जी के सिंदूर का महत्व ~~~~~~~~~~~~~~~~ हनुमान जी के दोनों पैरों पर लगा सिंदूर बहुत ही प्रभावशाली होता हैं. ऐसा माना जाता हैं कि इस सिंदूर का तिलक जब कोई भी व्यक्ति अपने मस्तिष्क पर लगता हैं. तो हनुमान जी उस व्यक्ति को सद्बुद्धि प्रदान करते हैं. इसीलिए हनुमान जी को बल और बुद्धि का दाता भी माना जाता हैं तथा इसीलिए जो व्यक्ति या बच्चे ज्यादा जिद्दी या गुस्सैल होते हैं. उनके लिए यह सिंदूर बहुत ही उपयोगी सिद्ध होता हैं. हनुमान जी के सिंदूर को लगाने के बाद व्यक्ति का गुस्सा जैसे – एक दम से ही गायब हो जाता हैं और जिद्द धीरे – धीरे ख़त्म हो जाती हैं. हनुमान जी के सिंदूर को लगाने से व्यक्ति को इन दोनों ही चीजों से मुक्ति तो मिलती ही हैं. इसके साथ ही उन्हें पुण्य लाभ भी प्राप्त होता है। साभार~ पं देव शर्मा🔥 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️1416
- पहाड़ सिंह पंवार#भक्ति भाव ऊं नम शिवाय2624
- davindersharma#भक्ति #भ भक्ति भावनाएं #जय खाटू श्याम #🥰 हारे का सहारा खाटु शयाम बाबा 🥰 #शुभ खाटु श्याम बाबा1820
- 818962#🌺राधा कृष्ण💞 #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 #भक्ति #🌞गुड मॉर्निंग☕🌞1K511