Rajnee Gupta
532 views 18 hours ago
मन की हर इच्छा को पूरा करना जरूरी नहीं होता। कई बार हम जो चाहते हैं, वह हमारी जरूरत नहीं, केवल मन की आदत या क्षणिक आकर्षण होता है। जब मन कहे, मुझे यह चाहिए, तो तुरंत उसके पीछे भागने के बजाय एक पल रुकिए। स्वयं से पूछिए, क्या यह सच में जरूरी है? यह छोटा-सा विराम हमें इच्छा और आवश्यकता के बीच का अंतर समझाता है। धीरे-धीरे मन बाहरी चीज़ों पर निर्भर होने के बजाय, जो है उसमें संतुष्ट रहना सीखता है। हर चाह पूरी करना समृद्धि नहीं है। कुछ चाहों को छोड़ देना भी मन की सम्पन्नता है। #📃लाइफ कोट्स ✒️
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