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#श्रीमद् भगवद गीता #गीता
श्रीमद् भगवद गीता - श्रोपरमात्मने নপ: Il || श्रीमद्भगवद्गीता अथ प्रथमोउध्यायः धृतराष्ट्र उवाच कुरुक्षेत्रे ೫೫ समवेता ಶಶನಾ: | मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय I। धृतराष्ट्र बोले - हे संजय ! धर्मभूमि कुरुक्षेत्रमें इच्छावाले मेरे और  पाण्डुके एकत्रित, युद्धकी पुत्रोंने क्या किया ? II १ II सञ्जय उवाच दृष्ट्ा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा आचार्यमुपसङ्गम्य  वचनमब्रवीत् राजा दुर्योधनने  মতয  নীল-ওম राजा समय व्यूहरचनायुक्त पाण्डवोंकी सेनाको देखकर और द्रोणाचार्यके पास जाकर यह वचन कहा II २ II पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्। व्यूढां   द्रुपदपुत्रेण  तव शिष्येण   धीमता ।। हे आचार्य ! आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्नद्वारा व्यूहाकार खडी की हुई पाण्डुपुत्रोंकी इस बड़ी भारी सेनाको देखिये।। ३ ।। गोरखपुर गीता प्रेस , से साभार श्रोपरमात्मने নপ: Il || श्रीमद्भगवद्गीता अथ प्रथमोउध्यायः धृतराष्ट्र उवाच कुरुक्षेत्रे ೫೫ समवेता ಶಶನಾ: | मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय I। धृतराष्ट्र बोले - हे संजय ! धर्मभूमि कुरुक्षेत्रमें इच्छावाले मेरे और  पाण्डुके एकत्रित, युद्धकी पुत्रोंने क्या किया ? II १ II सञ्जय उवाच दृष्ट्ा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा आचार्यमुपसङ्गम्य  वचनमब्रवीत् राजा दुर्योधनने  মতয  নীল-ওম राजा समय व्यूहरचनायुक्त पाण्डवोंकी सेनाको देखकर और द्रोणाचार्यके पास जाकर यह वचन कहा II २ II पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्। व्यूढां   द्रुपदपुत्रेण  तव शिष्येण   धीमता ।। हे आचार्य ! आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्नद्वारा व्यूहाकार खडी की हुई पाण्डुपुत्रोंकी इस बड़ी भारी सेनाको देखिये।। ३ ।। गोरखपुर गीता प्रेस , से साभार - ShareChat