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#पूजा पाठ #🕉️सनातन धर्म🚩 #☝अनमोल ज्ञान पूजा आदि कर्म मे सर ढकें या नहीं..? 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ पूजा आरती करते समय पगड़ी टोपी कभी नहीं पहने भूल कर भी धर्म शास्त्रों की आज्ञा है पूजन यज्ञ में सर पे पगड़ी रूमाल ना बांधे। अत्यावश्यक विषय अवश्य पढ़े 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️👇 सिर पर रुमाल या पकड़ी बांधकर पूजा करने वाले ध्यान दें। आपका यह कार्य शास्त्र विरुद्ध है। पूजा जप यज्ञ आदि शुभ कार्य करते समय सिर को वेष्टित नहीं करना चाहिए अर्थात् जो आजकल रुमाल आदि रख लेते हैं वो नहीं रखना चाहिए आचार्य चरण कहते हैं। उष्णीषि कंचुकी नग्नो मुक्तकेशो गलावृत:। अपवित्रकरोशुद्ध: प्रलपन्न जपेत्क्वचित्।। अर्थात्👉 पगड़ी, कंचुकी(सिले हुए वस्त्र) नग्न होकर शिखा या केश खोलकर, (गमछे या मफलर आदि से) गले को आवृत करके, अपवित्र हाथ वाला होकर और बकते हुए कभी जप नहीं करना चाहिए। यहाँ जप शब्द समस्त पूजा, यज्ञ आदि शुभ कार्यों का उपलक्षण है। ( भोजन के समय भी ऐसा निर्देश है ) हाँ यात्रा आदि के समय पगड़ी बांधना वर्जित नही है। केवल पूजा आदि शुभ कार्यों में ही पगड़ी, रुमाल आदि बाँधना वर्जित है। कूर्मपुराण, देवीभागवत प्रभृति आर्ष ग्रंथों के अनुसार मलोत्सर्ग करते समय सिर को रुमाल गमछे आदि से ढकने को कहा गया है।आज कैसी कुप्रथा चल पड़ी है हिंदुओं में यह आप स्वयं विचार करिये जो कार्य शौच में किया जाता है वह अब पूजा पाठ करते समय हो रहा है। म्लेच्छों का अंधानुकरण,अत: जो हिंदू ऐसा करते हों आज से यह पाप कर्म करना छोड़ दें। साभार~ पं देव शर्मा💐 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
पूजा पाठ - पूजा आदि कर्म करते समय सर को ढके या नहीं पूजा आदि कर्म करते समय सर को ढके या नहीं - ShareChat