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#rajdhani #Rajdhani me
rajdhani - हिलता हुआ थम गया है अचानक सब कुछ अश्वमेघ के संस्कार में भव्य घोड़ा ही बैठ गया पसरकर अब कहीं जाने से क्या लाभ? तुम धरती स्वीकार करते हो विजित करते हो जनपद पर जनपद लेकिन अज्ञान , निर्धनता और बीमारी के ही तो राजा মী लौट रही हैं सुहागिन स्त्रियाँ गीत नहीं कोई किस्सा मज़ाक सुना रही हैं- थक गए हैं राजा उनका घोडा बूढा दार्शनिक हो चला अब उन्हें सिर्फ़ राजधानी के परकोटे में ही फटकारते हुए घूमना चाहिए अपना चाबुक राजधानी में सब कुछ उपलब्ध है बुढापे में सुंदरियाँ होटलों की अंतर्महाद्वीपीय परोसदारियाँ राजधानी में खानसामे तक सुनाते हैं रसोई में महायुद्धों की चटपटी हिलता हुआ थम गया है अचानक सब कुछ अश्वमेघ के संस्कार में भव्य घोड़ा ही बैठ गया पसरकर अब कहीं जाने से क्या लाभ? तुम धरती स्वीकार करते हो विजित करते हो जनपद पर जनपद लेकिन अज्ञान , निर्धनता और बीमारी के ही तो राजा মী लौट रही हैं सुहागिन स्त्रियाँ गीत नहीं कोई किस्सा मज़ाक सुना रही हैं- थक गए हैं राजा उनका घोडा बूढा दार्शनिक हो चला अब उन्हें सिर्फ़ राजधानी के परकोटे में ही फटकारते हुए घूमना चाहिए अपना चाबुक राजधानी में सब कुछ उपलब्ध है बुढापे में सुंदरियाँ होटलों की अंतर्महाद्वीपीय परोसदारियाँ राजधानी में खानसामे तक सुनाते हैं रसोई में महायुद्धों की चटपटी - ShareChat