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#आध्यात्म🕉️🙏🏻 #सामाजिक समस्या# #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान
आध्यात्म🕉️🙏🏻 - वाह रे इंसान लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है पर बेजुबान जीव को मार के खाता है। छोड देते है भोजन जिसमें एक बाल है। फिरक्यो खाते हो अंडा जिसमें एक मां का लाल है | एक पत्थर सिर्फ एक बार मंदिर जाता है। और है। इंसान हर रोज मंदिर जाता भगवान बन जाता है फिर भी पत्थर बन जाता है लिए  एक औरत बेटे को जन्म देने के अपनी सुन्दरता त्याग देती है। और वही बेटा एक सुन्दर बीवी के लिए अपनी मां को त्याग देता है |  सिर्फ फूल जीवन में हर जगह हम जीत चाहते है।  वाले की दुकान ऐसी है, जहां हम कहते है कि हार चाहिए क्योंकि हम भगवान से जीत नही सकते। वाह रे इंसान लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है पर बेजुबान जीव को मार के खाता है। छोड देते है भोजन जिसमें एक बाल है। फिरक्यो खाते हो अंडा जिसमें एक मां का लाल है | एक पत्थर सिर्फ एक बार मंदिर जाता है। और है। इंसान हर रोज मंदिर जाता भगवान बन जाता है फिर भी पत्थर बन जाता है लिए  एक औरत बेटे को जन्म देने के अपनी सुन्दरता त्याग देती है। और वही बेटा एक सुन्दर बीवी के लिए अपनी मां को त्याग देता है |  सिर्फ फूल जीवन में हर जगह हम जीत चाहते है।  वाले की दुकान ऐसी है, जहां हम कहते है कि हार चाहिए क्योंकि हम भगवान से जीत नही सकते। - ShareChat