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#भगवद गीता के सभी श्लोक #श्रीमद भगवद गीता उपदेश 🙏🙏 ##भगवद गीता🙏🕉️ #🚩🔯श्रीमद भगवद गीता🔯🚩 #भगवद गीता अध्यन 📖
भगवद गीता के सभी श्लोक - श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 2 नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः | न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः I। इस आत्माको शस्त्र नहीं काट सकते, इसको आग नहीं जला सकती, इसको जल नहीं गला सकता और वायु नहीं सुखा सकता II २३ II अच्छेद्योउ्यमदाह्योउ्यमक्लेद्योउशोष्य एव च। नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोउ्यं सनातनः Il क्योँकि यह आत्मा अच्छेद्य है, यह आत्मा अदाह्य, अक्लेद्य और निःसन्देह अशोष्य है तथा नित्य, सर्वव्यापी, स्थिर 3/4(1, आत्मा 46 रहनेवाला और सनातन है Il २४ Il অন্সক্ষীৎমমমিনত্ীৎমমনিন্ধামীৎমমুম্সন | नानुशोचितुमर्हसि विदित्वैनं तस्मादेवं यह आत्मा अव्यक्त है, यह आत्मा अचिन्त्य है और यह आत्मा विकाररहित कहा जाता है। इससे हे अर्जुन ! इस आत्माको उपर्युक्त प्रकारसे जानकर तू शोक करनेको योग्य नहीं है अर्थात् तुझे शोक करना उचित नहीं है Il २५ Il गीता प्रेस , गोरखपुर से साभार श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 2 नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः | न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः I। इस आत्माको शस्त्र नहीं काट सकते, इसको आग नहीं जला सकती, इसको जल नहीं गला सकता और वायु नहीं सुखा सकता II २३ II अच्छेद्योउ्यमदाह्योउ्यमक्लेद्योउशोष्य एव च। नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोउ्यं सनातनः Il क्योँकि यह आत्मा अच्छेद्य है, यह आत्मा अदाह्य, अक्लेद्य और निःसन्देह अशोष्य है तथा नित्य, सर्वव्यापी, स्थिर 3/4(1, आत्मा 46 रहनेवाला और सनातन है Il २४ Il অন্সক্ষীৎমমমিনত্ীৎমমনিন্ধামীৎমমুম্সন | नानुशोचितुमर्हसि विदित्वैनं तस्मादेवं यह आत्मा अव्यक्त है, यह आत्मा अचिन्त्य है और यह आत्मा विकाररहित कहा जाता है। इससे हे अर्जुन ! इस आत्माको उपर्युक्त प्रकारसे जानकर तू शोक करनेको योग्य नहीं है अर्थात् तुझे शोक करना उचित नहीं है Il २५ Il गीता प्रेस , गोरखपुर से साभार - ShareChat