बोलो......
धरती पर
लहजा सुधार लो
नहीं अमर
नहीं अकेले
इस जमीन पर
तुम और मैं
यह आवाज
व्यवहार ऐसा
अशोभनीय
चिल्लाहटें
फाड़ डालती हैं
कान के पर्दे
चीर देती हैं
हो कलेजे के पार
झकझोरतीं
समुदाय है
जो सुनता है सब
वो अन कहा
समाज जाने
पड़ौसी यार दोस्त
व्यवहार
एक शौ है
है जीवंत नाटक
जीना अपना
किरदार को
निभाना है बखूबी
हम सबको
खलनायक
नायक मसखरा
की भूमिका में
मैं कहता हूं
खुद ही से जिगर
अमर नहीं।
#🙏शाम की आरती🪔 #जिगर_चूरूवी
00:00

