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#खिचड़ी कोई भी पका सकता है लोकतंत्र एवं प्रजातंत्र की रक्षार्थ है यह खिचड़ी।
खिचड़ी कोई भी पका सकता है लोकतंत्र एवं प्रजातंत्र की रक्षार्थ है यह खिचड़ी। - T हास्य व्यंग जब कानून की आंख पर पट्टी बंधी थी तब वह देख लेता था खुल गई है अब जब पट्टी तब से वह अंधा गूंगा बहरा लूला लंगड़ा हो गया करना सीख गया गया गुलामी Status (Contacts) + # T हास्य व्यंग जब कानून की आंख पर पट्टी बंधी थी तब वह देख लेता था खुल गई है अब जब पट्टी तब से वह अंधा गूंगा बहरा लूला लंगड़ा हो गया करना सीख गया गया गुलामी Status (Contacts) + # - ShareChat