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*🙏 सादर वन्दे🙏*
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*आपको धनतेरस , रूप चौदस , दीपावली ,गौवर्धनपूजा एवं भाईदूज , पंचदिवसीय पावन पर्व की सपरिवार बधाई एवं शुभकामनाएँ ।*
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*🚩धर्मयात्रा 🚩*
*🎄कृष्ण मन्दिर , उडुपी🎄*
दक्षिण भारत में भगवान कृष्ण के कई अनोखे और सुन्दर मन्दिर है , जिनमें से एक है *उडुपी का कृष्ण मन्दिर*।इस मन्दिर की सबसे खास बात यह है कि इस मन्दिर में अपने भक्त को दर्शन देने के लिए भगवान श्रीकृष्ण खुद ही मन्दिर की खिड़की तक चले आए थे।
कहा जाता है कि एक बार यहाँ पर भगवान कृष्ण के दर्शन करने के लिए कनकदास नाम का एक भक्त आया।
किन्हीं कारणों से भक्त कनकदास को मन्दिर में प्रवेश कर , भगवान कृष्ण के दर्शन करने की आज्ञा नहीं दी गई।
उदास होकर भक्त कनकदास मन्दिर के पीछे , खिड़की के पास जा खड़ा हुआ और वहीं से भगवान के दर्शन करने की कोशिश करने लगा। भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर , भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति खुद ही चलकर मन्दिर की खिड़की के पास आ गई और कनकदास को खिड़की से दर्शन दिए । उस दिन से लेकर आज तक भगवान कृष्ण की मूर्ति मन्दिर में , पीछे की ओर देखते हुई ही स्थापित है , भगवान श्रीकृष्ण ने पश्चिम की ओर मुख कर लिया , जिससे कि भक्त खिड़की से उनके दर्शन कर सकें। तभी से भक्त आज भी खिड़की से ही भगवान श्री कृष्ण के दर्शन करते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को सीधे नहीं , बल्कि एक ' नवग्रह किटिकी ' नामक खिड़की से देखा जाता है।
इस खिड़की को "कान्हा की खिड़की" भी कहते हैं। इस खिड़की में 9 छोटे-छोटे छेद हैं , - नौ छिद्रों वाली यह छोटी खिड़की नौ ग्रहों का प्रतीक मानी जाती है । इन नो छिद्रों
में से अंदर झाँकने पर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन होते हैं।
मन्दिर में भगवान श्री कृष्ण की यह सबसे सुन्दर मूर्ती मानी जाती है, जिसमें वे बचपन के रूप , बालकृष्ण के रूप में विराजमान हैं।
इस मन्दिर के निर्माण के बारे में ऐसा कहा जाता है कि एक बार यहाँ भयंकर समुद्री तूफान आया। उसी दौरान संत माधवाचार्य समुद्र के किनारे खड़े थे। उन्होंने देखा कि एक जहाज समुद्र के बीच में फँस गया है। यह देखकर वे अपनी शक्तियों से जहाज को सुरक्षित किनारे तक ले आए। जहाज पर सवार लोगों ने संत को धन्यवाद देते हुए , भेंट के रूप में भगवान श्री कृष्ण और बलराम की दो मूर्तियाँ दी। संत ने भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को उडुपी में और भगवान बलराम की मूर्ति को यहाँ से 5 कि.मी.दूर *मालपी* नाम की जगह पर स्थापित कर दिया। *मालपी के बलराम मन्दिर को वदंबेदेश्वरा मन्दिर और उडुपी के कृष्ण मन्दिर को कृष्ण मठ कहा जाता है।* यहाँ भगवान श्रीकृष्ण की सुंदर मूर्ति है , जिसमें वे अपने दाएँ हाथ में एक मथानी और बाएँ हाथ में रस्सी पकड़े हुए हैं।एक किंवदंती यह भी है कि यह मूर्ति माधवाचार्य ने समुद्र में डूबी हुई अवस्था में खोजी थी ।
इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि यहाँ विराजित श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने एक अखण्ड दीपक है, जो पिछले 700 वर्षों से निरन्तर जल रहा है।
कर्नाटक का उडुपी , कृष्ण मन्दिर अपने भोजन के लिए भी प्रसिद्ध है ।
जिसे भगवान को चढ़ाने के लिये बनाया जाता है और ऐसा सदियों से हो रहा है। यह भोजन पूर्णतः स्वादिष्ट होता है जिसमें चावल , सांभर , करी , रसम और मिठाइयाँ शामिल होती हैं। दरअसल , यह भोजन अपनी स्वादिष्ट चटनी के लिए प्रसिद्ध है – एक अनोखी चटनी जिसकी हर कोई तारीफ़ करता हैं , वह तुरई से बनती है। यहाँ पर परोसी जाने वाली अनोखी कटहल की करी की भी तारीफ़ की जाती हैं। ये सब रसोई मन्दिर में बिना प्याज़ व लहसुन के तैयार की जाती है।
यहाँ प्रतिदिन आपको सैकड़ों लोग एक पंक्ति में बैठकर केले के पत्ते पर पूरा भोजन करते हुए मिलेंगे। भारत के इस कृष्ण मन्दिर की एक खासियत यह भी है कि यहाँ हर दिन लोगों को मुफ्त में भोजन कराया जाता है।
कई श्रद्धालुओं को मन्दिर के फर्श पर प्रसाद परोसा जाता है। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धालु खुद फर्श पर प्रसाद परोसने की मांग करते हैं। इसकी वजह यह है कि इस मन्दिर में उनकी मनोकामना पूरी हुई है । दरअसल , जिन भक्तों की मनोकामना पूरी होती है , वे मन्दिर के फर्श पर प्रसाद खाते हैं।
उडुपी मैंगलोर से मात्र 54 कि.मी. की दूरी पर स्थित है , यह आपकी यात्रा के रूट पर ही अगला पड़ाव है ।उडुपी की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय दिसम्बर - फ़रवरी का समय है ।
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*🙏शिव🙏9993339605*
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#मंदिर दर्शन


