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कू-ए-बुताँ तक फिरूँ आराम-ए-जाँ की ख़्वाहिश लिए, वर्ना मैं निकलूँ भी तो घर से कहाँ की ख़्वाहिश लिए। – अमित राज श्रीवास्तव #✍️ साहित्य एवं शायरी #📖 कविता और कोट्स✒️ #📓 हिंदी साहित्य #अमित राज श्रीवास्तव #अमित राज श्रीवास्तव की शायरी
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