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Sahitya Page
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4 महीने पहले
कू-ए-बुताँ तक फिरूँ आराम-ए-जाँ की ख़्वाहिश लिए, वर्ना मैं निकलूँ भी तो घर से कहाँ की ख़्वाहिश लिए। – अमित राज श्रीवास्तव
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