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#इवेंट_मैनेजमेंट - धर्म स्थल पूज्य के नाम पे राजनीति शो। धर्म उत्सव, आस्था का पर्व पारम्परिक। लेकिन क्यों धर्म मंच पे नहीं धर्माधिकारी। यहां पे सिर्फ दो महान लोग हैं वो नेतागण। क्यों हुआ है धार्मिक आयोजन राजनैतिक। मंच पे धर्म प्रतिनिधि नहीं नेता मौजूद। ये कार्यक्रम प्रेरित प्रायोजित ग्रेट इवेंट। नींव की शिला रखते हैं नेताजी उद्घाटन भी। झंडा चढ़ाएं वही महानुभव हैं उद्दीपक। धर्माचार्य इतनी दूर क्यों आस्था के नाम। उपास्य थे हैं और रहेंगे भी कौन ले आया। क्या ला सके खुदा राम देवता अंगुली पर। पूरी कोशिश जन स्मृति में ये बो दिया जाए मैंने बनाया हूं मैं ले कर आया मेरे साथ में। राजनीतिक नशे का उत्पाद जहरीला है। मंच पे बैठे सफेद चेहरे के काले मनके ये गलत है दांव रणनीतिक उलटे पड़े। धर्म का धंधा मजहब की रोटी जहरीली है। क्या ये ठीक मूर्खता नहीं है आम जन से। जनता जाने विश्वास नहीं है सत्ता का खेल। चुनावी स्टंट प्रॉप की तरह का उपयोग। समृद्धि क्या खुद को केंद्र में रखना होगा। रोटी कपड़ा व मकान को भूले दुःखी जनता। ईश्वर जाने समझ मानव की संकुचित है। प्यासे खून के राजनीति इवेंट क्या लाभ दे। बहुत हुआ सीमा से बाहर है अब सहना। अलग करो धर्म मजहब चुनावों से। अल्लाह, राम शस्त्र नहीं आस्था खिलवाड़ नहीं। आरती अजां एक हो जाएं तो झगड़ा खत्म। जिसको जहां जाना हो सहर्ष चला जाएगा। जिगर सुनो इस नशे को बंद करना होगा। #जिगर_चूरूवी
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