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#guljar ki shayari
guljar ki shayari - 66 खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं हवा चले न चले दिन पलटते रहते है गापणापणाण JJ अमरउजाला M@ /amarujalakavya 66 खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं हवा चले न चले दिन पलटते रहते है गापणापणाण JJ अमरउजाला M@ /amarujalakavya - ShareChat