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धर्म - ಭಗಿತಗಕೆ ಹ ಫೆ गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र , जिन्हें श्री कृष्ण १ , अश्वत्थामा के श्राप के कारण पृथ्वी पर भटकना पडा। নিষ্ু एक महान दानी जिन्हें भगवान राजा वली 2 . के वामन अवतार से वरदान मिला। महाभारत के रचयिता और वैदो ३ , महर्षि वेदव्यास के संकलन कर्ता जिन्हें अमरतवा प्राप्त हैं। जिन्हें हनुमान जी भगवान राम के 4 م परम भक्त अमरतवा का वरदान मिला जो आज़ भी पृथ्वी है। भिवीषण रावण के भाई जो धर्म के पक्षधर थे 5 और भगवान राम के साथ रहें इस लिए वे चिंरजीवी है। कृपाचार्य कौरवों और पांडवों के कुल गुरु जो 6 महाभारत काल से जीवित है। विष्णु के छठे अवतार जिन्हें ७, परशूराम भगवान चिंरजीवी होने का वरदान प्राप्त हैं और वे आज भी पर मानें जाते हैं। पृथ्वी मार्कंडेय ऋषि को है कि अमर इस लिए माना जाता उन्होंने अपनी अट्ूट शिव भगति से देवता मृत्यु के पराजित किया और 3 से भगवान   शिव यमराज 3মংননা কা নংমান সাদ কিমা | तक जीवित रहते जिससे چ5 নাল چ अंत सृष्टि चिरस्थाई प्राणीयो में शामिल हों गये। जबकि उन्हें अल्प आयु १६ वर्ष का श्राप मिला था जिसे उन्होंने अपनी भगति से बदल दिया। ಭಗಿತಗಕೆ ಹ ಫೆ गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र , जिन्हें श्री कृष्ण १ , अश्वत्थामा के श्राप के कारण पृथ्वी पर भटकना पडा। নিষ্ু एक महान दानी जिन्हें भगवान राजा वली 2 . के वामन अवतार से वरदान मिला। महाभारत के रचयिता और वैदो ३ , महर्षि वेदव्यास के संकलन कर्ता जिन्हें अमरतवा प्राप्त हैं। जिन्हें हनुमान जी भगवान राम के 4 م परम भक्त अमरतवा का वरदान मिला जो आज़ भी पृथ्वी है। भिवीषण रावण के भाई जो धर्म के पक्षधर थे 5 और भगवान राम के साथ रहें इस लिए वे चिंरजीवी है। कृपाचार्य कौरवों और पांडवों के कुल गुरु जो 6 महाभारत काल से जीवित है। विष्णु के छठे अवतार जिन्हें ७, परशूराम भगवान चिंरजीवी होने का वरदान प्राप्त हैं और वे आज भी पर मानें जाते हैं। पृथ्वी मार्कंडेय ऋषि को है कि अमर इस लिए माना जाता उन्होंने अपनी अट्ूट शिव भगति से देवता मृत्यु के पराजित किया और 3 से भगवान   शिव यमराज 3মংননা কা নংমান সাদ কিমা | तक जीवित रहते जिससे چ5 নাল چ अंत सृष्टि चिरस्थाई प्राणीयो में शामिल हों गये। जबकि उन्हें अल्प आयु १६ वर्ष का श्राप मिला था जिसे उन्होंने अपनी भगति से बदल दिया। - ShareChat