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#श्रीरामचरितमानस चोपाई 🌹🙏🌹श्रीरामचरितमानस 🌹🙏🌹 ❤️घन घमंड नभ गरजत मोरा ।प्रिया हीन डरपत मन मोरा । दामिनि दमक रह न गृह माहीं खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं ❤️ ( किष्किंधाकांड ) ❤️🙏सुग्रीव को राजा बनाकर राम जी वर्षा ऋतु में प्रवर्षण पर्वत पर वास कर रहे हैं । वे लक्ष्मण से कहते हैं कि आकाश में बादल घुमड़ कर गर्जना कर रहें हैं , सीता के बिना मेरा मन डर रहा है । बिजली चमक कर बादलों में ठहरती नहीं है जैसे दुष्ट का प्रेम स्थिर नहीं रहता है ।🙏❤️ 🌹 🙏दुष्ट का प्रेम स्थिर नहीं रहता है जबकि राम प्रेम स्थिर व पक्का रहता है , आप उनसे प्रेम करके तो देखें । जितना आप राम जी को प्रेम करेंगे उसका दूना राम जी आपसे करेंगे । अतएव दुष्ट से नहीं राम जी प्रेम करें व सदा राम प्रेम पाते रहें । 🙏🌹
श्रीरामचरितमानस चोपाई - |/34*7</ || अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता , असबरदीन जानकी माता।| ३१ || आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है। |/34*7</ || अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता , असबरदीन जानकी माता।| ३१ || आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है। - ShareChat