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#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि शास्त्र विरुद्ध श्राद्ध! गीता अध्याय 9 श्लोक 25 के अनुसार, पितरों की पूजा करने वाले पितरों को ही प्राप्त होते हैं, उन्हें मोक्ष नहीं मिलता। शास्त्रानुकूल विधि जानें।
श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि - श्राद्ध उनके लिए निकालते हैंजो मृत्यु को प्राप्त हो गए यानी प्रेत पित्तर बन गए। गीता अध्याय 9 श्लोक २५ में श्राद्ध के लिए मना किया गया है। विष्णु पुराण में लिखा है॰ व्यास जी कहरहे हैंकि हे राजन! श्राद्ध के समय यदि एक हजार ब्राह्मण भोजन करने आये हों। और तरफ योगी बैठ जा।तोवो ब्राह्मणों समेत , पित्तरों समेत , UC यजमानों समेत सबका उद्धार कर देता है। वह योगी कौन है२ गीता अध्याय 2 श्लोक ५३ में बताया है कि अर्जुन जब भिन्न वचनों से तेरी बुद्धि हटकर भिन्न प्रकार से भ्रमित करने वाले में स्थिर हो जाएगी। तब तो तू योगी बनेगा। COGCIసIIGI संत रामपालजी महाराज जी के शिष्य सारे योगी हैं। औरजैसे उनके आश्रमों में समागम होते हैं उनमें लाखों योगी भोजन करते हैं। वहां दिए गए दान से पितरों काभी उद्धार, भूतों काभी उद्धार और दान करने वालोंकाभी उद्धार होता है। श्राद्ध उनके लिए निकालते हैंजो मृत्यु को प्राप्त हो गए यानी प्रेत पित्तर बन गए। गीता अध्याय 9 श्लोक २५ में श्राद्ध के लिए मना किया गया है। विष्णु पुराण में लिखा है॰ व्यास जी कहरहे हैंकि हे राजन! श्राद्ध के समय यदि एक हजार ब्राह्मण भोजन करने आये हों। और तरफ योगी बैठ जा।तोवो ब्राह्मणों समेत , पित्तरों समेत , UC यजमानों समेत सबका उद्धार कर देता है। वह योगी कौन है२ गीता अध्याय 2 श्लोक ५३ में बताया है कि अर्जुन जब भिन्न वचनों से तेरी बुद्धि हटकर भिन्न प्रकार से भ्रमित करने वाले में स्थिर हो जाएगी। तब तो तू योगी बनेगा। COGCIసIIGI संत रामपालजी महाराज जी के शिष्य सारे योगी हैं। औरजैसे उनके आश्रमों में समागम होते हैं उनमें लाखों योगी भोजन करते हैं। वहां दिए गए दान से पितरों काभी उद्धार, भूतों काभी उद्धार और दान करने वालोंकाभी उद्धार होता है। - ShareChat