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👉 दुआ माँगने की तरगीब (प्रेरणा) 👈 👉🏿 `हुज़ूर ग़ौस-ए-आज़म दस्तगीर (रदी-अल्लाह-अन्ह) फरमाते हैं:` > यह मत कहो कि मैं अल्लाह से दुआ नहीं करता, कि जो चीज़ मेरे नसीब में है, तो चाहे मैं दुआ करूँ या न करूँ, वह मुझे मिल ही जाएगी! और अगर वह चीज़ मेरे नसीब में नहीं है, तो मेरी दुआ मुझे वह चीज़ नहीं दिला सकती। 👉🏿 दुनिया और आख़िरत में जो भी भलाई तुम्हें चाहिए, माँग लो, बशर्ते वह हराम न हो या बिगाड़ का कारण न हो, क्योंकि अल्लाह तआला ने तुम्हें दुआ माँगने का हुक्म दिया है। क़ुरआन शरीफ मे अल्लाह पाक का इरशाद है: `عدْعُوْنِيْۤ اسْتَجِبْ لَكُمْ` कंज़-उल-ईमान का अनुवाद:👉🏿 "मुझसे दुआ करो, मैं तुम्हारी क़ुबूल करूँगा।"` (कुरान 24, अल-मोमिन: 60) और यह भी कहा गया है: और `"अल्लाह से उसका फज़ल मांगो।"` (कुरान 5, अन-निसा: 32) 📘 (शरह फतुहुल-ग़ैब (अनुवादक), पृष्ठ 666, संक्षेप में) ┍━━━━━━━✿✿✿✿━━━━━━━┑ ❖ ꜰᴀᴄᴇʙᴏᴏᴋ || Chaudhary Abdul Aziz Rayeen ❖ ┕━━━━━━━✿✿✿✿━━━━━━━┙ #दरगाह #ya Gause Al madad #☪ सूफी संगीत 🕌 #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋
दरगाह - ABDUL AzIZ RAYEEN  ABDUL AzIZ RAYEEN - ShareChat