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#विजय पाल #📓 हिंदी साहित्य #📖 कविता और कोट्स✒️ #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख
विजय पाल - श அdo प्रकृति आपको स्वयं फूल देती है बिना जब चाहे, बिना मांगे , बिना तोड़े। तब अनायास ही जन्म लेती है एक कविता , मानो प्रकृति का इशारा हो सब बेहतर ` वाला है। 87' आकृति श அdo प्रकृति आपको स्वयं फूल देती है बिना जब चाहे, बिना मांगे , बिना तोड़े। तब अनायास ही जन्म लेती है एक कविता , मानो प्रकृति का इशारा हो सब बेहतर ` वाला है। 87' आकृति - ShareChat