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।। श्री हरि: ।। हे नाथ ! हे मेरे नाथ !! मैं आपको भूलूँ नहीं !! “ भगवान से विमुख होकर संसार के सम्मुख होने के समान कोई पाप नहीं है। ” -श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🪔मार्गशीर्ष अमावस्या📿 #🌸जय सिया राम #🌸 जय श्री कृष्ण😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - !! ओम नमो नारायणाय !! श्री हरिः ।l |  हे नाथ ! हे मेरे नाथ !! मैं आपको भूलूँ नहीं !! विमुख होकर संसार के सम्मुख होने भगवान से के समान कोई पाप नहीं है। गोरखपुर श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज, गीता प्रेस !! ओम नमो नारायणाय !! श्री हरिः ।l |  हे नाथ ! हे मेरे नाथ !! मैं आपको भूलूँ नहीं !! विमुख होकर संसार के सम्मुख होने भगवान से के समान कोई पाप नहीं है। गोरखपुर श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज, गीता प्रेस - ShareChat