#सतभक्ति संदेश
कबीर, गृह कारण में पाप बहु, नित लागै सुन लोय।
ताहिते दान अवश्य है, दूर ताहिते होय ।।
कबीर, चक्की चौकै चूल्ह में, झाडू अरू जलपान। गृह आश्रमी को नित्य यह, पाप पाँचौ विधि जान।।
संत रामपाल जी
भावार्थ-
गृहस्थी को चक्की से आटा पीसने में, खाना बनाने में चूल्हे में अग्नि जलाई जाती है। चौंका अर्थात् स्थान लीपने में तथा झाडू लगाने तथा खाने तथा पीने में पाँच प्रकार से पाप लगते हैं। हे संसारी लोगो! सुनो! इन कारणों से आपको नित पाप लगते हैं। इसलिए दान करना आवश्यक है। ये पाप दान
![सतभक्ति - कबीर गृह कारण में पाप बहु, नित लागै सुन लोया ताहिते दान अवश्य है, टूर ताहिते होय।[ संत रामपाल जी कबीर, चक्की चौंकै चूल्ह में॰ झाडू अरू जलपान। गृह आश्रमी को नित्य यह, पाप पाँचौ विधि जान। ] 4q9 _ को चक्की से आटा पीसने में, गृहस्थी बनाने में चूल्हे में अग्नि जलाई II चौंका अर्थात् स्थान लीपने जाती है में तथा झाडू लगाने तथा खाने तथा पीने में पाँच प्रकार से पाप लगते हैं । इन कारणों से हे संसारी लोगो! सुनो! आपको नित पाप लगते हैं इसलिए दान करना आवश्यक है ये पाप दान करने से ही नाश होंगे | जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Satlok Ashram संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने के लिए संपर्क करें :- +९१ ८२२२ ८८० ५४१ Follow us on कबीर गृह कारण में पाप बहु, नित लागै सुन लोया ताहिते दान अवश्य है, टूर ताहिते होय।[ संत रामपाल जी कबीर, चक्की चौंकै चूल्ह में॰ झाडू अरू जलपान। गृह आश्रमी को नित्य यह, पाप पाँचौ विधि जान। ] 4q9 _ को चक्की से आटा पीसने में, गृहस्थी बनाने में चूल्हे में अग्नि जलाई II चौंका अर्थात् स्थान लीपने जाती है में तथा झाडू लगाने तथा खाने तथा पीने में पाँच प्रकार से पाप लगते हैं । इन कारणों से हे संसारी लोगो! सुनो! आपको नित पाप लगते हैं इसलिए दान करना आवश्यक है ये पाप दान करने से ही नाश होंगे | जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Satlok Ashram संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने के लिए संपर्क करें :- +९१ ८२२२ ८८० ५४१ Follow us on - ShareChat सतभक्ति - कबीर गृह कारण में पाप बहु, नित लागै सुन लोया ताहिते दान अवश्य है, टूर ताहिते होय।[ संत रामपाल जी कबीर, चक्की चौंकै चूल्ह में॰ झाडू अरू जलपान। गृह आश्रमी को नित्य यह, पाप पाँचौ विधि जान। ] 4q9 _ को चक्की से आटा पीसने में, गृहस्थी बनाने में चूल्हे में अग्नि जलाई II चौंका अर्थात् स्थान लीपने जाती है में तथा झाडू लगाने तथा खाने तथा पीने में पाँच प्रकार से पाप लगते हैं । इन कारणों से हे संसारी लोगो! सुनो! आपको नित पाप लगते हैं इसलिए दान करना आवश्यक है ये पाप दान करने से ही नाश होंगे | जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Satlok Ashram संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने के लिए संपर्क करें :- +९१ ८२२२ ८८० ५४१ Follow us on कबीर गृह कारण में पाप बहु, नित लागै सुन लोया ताहिते दान अवश्य है, टूर ताहिते होय।[ संत रामपाल जी कबीर, चक्की चौंकै चूल्ह में॰ झाडू अरू जलपान। गृह आश्रमी को नित्य यह, पाप पाँचौ विधि जान। ] 4q9 _ को चक्की से आटा पीसने में, गृहस्थी बनाने में चूल्हे में अग्नि जलाई II चौंका अर्थात् स्थान लीपने जाती है में तथा झाडू लगाने तथा खाने तथा पीने में पाँच प्रकार से पाप लगते हैं । इन कारणों से हे संसारी लोगो! सुनो! आपको नित पाप लगते हैं इसलिए दान करना आवश्यक है ये पाप दान करने से ही नाश होंगे | जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Satlok Ashram संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने के लिए संपर्क करें :- +९१ ८२२२ ८८० ५४१ Follow us on - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_941514_366d30ee_1763460939870_sc.jpg?tenant=sc&referrer=pwa-sharechat-service&f=870_sc.jpg)

