#योगा ध्यान प्राणायाम #योग और प्राणायाम #प्राणायाम करने के फायदे #🧘योगा प्राणायाम
आकर्षक चेहरा और बलवान शरीर पाने के लिए, अभी तक आपने काफी कुछ किया होगा, लेकिन ये क्या आप जानते हो ओजस्वी चेहरा और मजबूत शहरीरीक बल के पीछे एक ऐसी विधा हे जिसे प्राणायाम कहते हैं जो ना सिर्फ आपको , आकर्षक बनाएगा बल्कि आपके वीर्य नाश की भरपाई भी करगा आने वाले कुछ महीनों में अगर आप एक अलग और बेहतर परिणाम देखना चाहते हैं जिसकी बुद्धि और ताकत पहले से कई गुना बढ़ चुकी हो तो पोस्ट को से जरूर कर लेना कुछ ऐसी प्राचीन प्राणायाम जो भारी से दयानंद सरस्वती जी प्रोफेसर राम मूर्ति जी के दिनचर्या का हिस्सा रह चुका है सुबह जब ताजी हवा में ब्रह्म मुहूर्त में खाली पेट आपको प्राणायाम जरूर करना
1 ब्रह्मा प्राणायाम
इसका अभ्यास करते समय सांस को बाहर फेंकते हैं और सांस को बाहर निकालने के बाद हम यथाशक्ति रोक देना हे ऐसा करते समय हमे मुलद्वार को ऊपर की ओर खींचना है जब तक मूल इंद्रियों को खींचेंगे तब तक सांस बार ही रखना है फिर जब घबराहट होने लगे तो सास को धीरे-धीरे अंदर की ओर लेना है 6 बार इसका अभ्यास करें
2 अभ्यंतर प्राणायाम
यानी कि भीतर की ओर अधिक से अधिक देर तक सांस को रोक के रखना है इसको करते समय ओम का जाप करें इस प्राणायाम का अभ्यास पिच बार करना है
3 स्तंभ वृति प्राणायाम
इस प्राणायाम में आप सामान्य सांस लेते जाए उसको अंदर हो या बाहर उसे वहीं पर रोक ले अंदर सांस अंदर और बाहर का संस्कार तो बाहर की तरफ एक जगह कहीं पर भी रोकता है जितनी देर आप रोक सकते हैं उतनी देर रूकने की कोशिश करें इस प्राणायाम का अभ्यास आप चार बार करें
4 ब्रह्मा अभियंतर विक्षेपी प्राणायाम
इस प्राणायाम में जब भी आपका साथ छोड़ने का मन हो तब उसे निकालना ना देना उल्टा बाहर से अंदर और सांस भर लेना और जब भी बाहर से अंदर सांस लेने का मन हो तब उल्टा अंदर से बाहर सांस छोड़ने और रोक देना ऐसे एक दूसरे से विरुद्ध क्रिया की जाए तो मां और इंद्रिय नियंत्रित रहती है इसे चार बार जरूर करें
अखंड ब्रह्मचारी इन चार प्राणायाम के बारे में रहते हैं कि जब व्यक्ति प्राणायाम करता है तो अशुद्ध का नाश और ज्ञान का प्रकाश हो जाता है जब तक मुक्ति ना हो तब तक उसकी आत्मा का ज्ञान लगाकर बढ़ता जाता है मन इंद्रियों के दोष मतकर निर्मल हो जाता है आपका आत्म बल बढ़ता है।
#डॉ0_विजय_शंकर_मिश्र:।।


