ShareChat
click to see wallet page
search
#आध्यात्मिक ज्ञान #देश भक्ति #कल्कि ज्ञान सागर #🙏 माँ वैष्णो देवी #कल्कि साधक
आध्यात्मिक ज्ञान - सत्यमेव जयते ऊँ विश्व शांति अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश मायावी मृत्युलोक से मुक्ति पाना है तो अपने भीतर के ईश्वरीय वैभव को जानो ககபு फलाग माहन 'एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति ' भावार्थ - सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में एक परमब्रह्म ही परमसत्य  है, जो अजन्मा , अजर -अमर , अविनाशी , गुण - दोष रहित है उसके जैसा न कोई था, न कोई है, नहीं कभी कोई होगा ।किन्तु उसी निर्गुण परमब्रह्म के दो स्वरूप , दो चरित्र  जो एक है, जो निर्गुण स्वरूप में परमसत्य है वहीं सगुण स्वरूप में सत-्असत है, होकर भी सृष्टि के सृजन व विस्तार के सृष्टि में अनेक प्रकार के लिए बना हुआ है।वहीं जीव-्जीवात्माओं का रूप धारण कर स्वयं कर्ता , भरता , हरता 1 सम्पूर्ण सृष्टि के सभी जीव-्जीवात्माओं का जन्मदाता , पालनहार है। अतः एक सगुण परब्रह्म के अलावा सृष्टि में अन्य कोई भी जीव-्जीवात्मा नहीं हैं । सृष्टि के सभी जीव-्जीवात्मा एक ही सगुण परब्रह्म के अनेक मायावी रूप हैं । सिर्फ मानव ही नहीं सृष्टि का जीव-्मात्र परमात्मा परब्रह्म स्वरूप है, जिसमें मानव को सगुण परमात्मा परब्रह्म की सर्वश्रेष्ठ कृति , सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी माना गया है।जिस प्रकार ईश्वर केदो स्वरूप दो चरित्र है, उसी प्रकार कर्मभूमि पर सभी कर्मयोगियों के भी दो स्वरूप दो चरित्र है।जो कर्मयोगी निर्गुण आत्मस्वरूपता में प्रभु परमब्रह्म  कर्मयोगी स्वरूप है, वहीं सगुण जीवात्मस्वरूपता में सगुण परब्रह्म स्वरूप है स्वर्ग सुख पर सत्कर्मी कर्मभूमि सकता है और अपने सगुण बनकर पा जीवात्मस्वरूप को त्यागकर विदेही विराट निर्गुण आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी  मैं से मुक्त  होकर अपना आत्मकल्याण कर सकता है। ईश्वर व स्वयं के बनकर सत्यस्वरूप को जानों अपना मानव जीवन सार्थकबनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें सत्यमेव जयते ऊँ विश्व शांति अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश मायावी मृत्युलोक से मुक्ति पाना है तो अपने भीतर के ईश्वरीय वैभव को जानो ககபு फलाग माहन 'एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति ' भावार्थ - सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में एक परमब्रह्म ही परमसत्य  है, जो अजन्मा , अजर -अमर , अविनाशी , गुण - दोष रहित है उसके जैसा न कोई था, न कोई है, नहीं कभी कोई होगा ।किन्तु उसी निर्गुण परमब्रह्म के दो स्वरूप , दो चरित्र  जो एक है, जो निर्गुण स्वरूप में परमसत्य है वहीं सगुण स्वरूप में सत-्असत है, होकर भी सृष्टि के सृजन व विस्तार के सृष्टि में अनेक प्रकार के लिए बना हुआ है।वहीं जीव-्जीवात्माओं का रूप धारण कर स्वयं कर्ता , भरता , हरता 1 सम्पूर्ण सृष्टि के सभी जीव-्जीवात्माओं का जन्मदाता , पालनहार है। अतः एक सगुण परब्रह्म के अलावा सृष्टि में अन्य कोई भी जीव-्जीवात्मा नहीं हैं । सृष्टि के सभी जीव-्जीवात्मा एक ही सगुण परब्रह्म के अनेक मायावी रूप हैं । सिर्फ मानव ही नहीं सृष्टि का जीव-्मात्र परमात्मा परब्रह्म स्वरूप है, जिसमें मानव को सगुण परमात्मा परब्रह्म की सर्वश्रेष्ठ कृति , सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी माना गया है।जिस प्रकार ईश्वर केदो स्वरूप दो चरित्र है, उसी प्रकार कर्मभूमि पर सभी कर्मयोगियों के भी दो स्वरूप दो चरित्र है।जो कर्मयोगी निर्गुण आत्मस्वरूपता में प्रभु परमब्रह्म  कर्मयोगी स्वरूप है, वहीं सगुण जीवात्मस्वरूपता में सगुण परब्रह्म स्वरूप है स्वर्ग सुख पर सत्कर्मी कर्मभूमि सकता है और अपने सगुण बनकर पा जीवात्मस्वरूप को त्यागकर विदेही विराट निर्गुण आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी  मैं से मुक्त  होकर अपना आत्मकल्याण कर सकता है। ईश्वर व स्वयं के बनकर सत्यस्वरूप को जानों अपना मानव जीवन सार्थकबनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat