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#sangati #sangati ka aser #Sangati ki mahima
sangati - कबीर संगत साधु की, नित प्रति कीजै जाय | दुरमति दूर बहावासी , देशी सुमति बताय || गुरु कबीर जी कहते हैं कि प्रतिदिन जाकर संतों की संगत करो | इससे तुम्हारी दुबुद्धि दूर हो जायेगी और सन्त सुबुद्धि बतला देंगे | कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय | खीर खांड़ भोजन मिलै, साकत संग न जाय || सन्त कबीर जी कहते हैं, सतों की संगत मैं, जौं की भूसी खाना अच्छा है | खीर और मिष्ठान आदि का भोजन मिले , तो भी साकत के संग मैं नहीं जाना ఇాగౌ | कबीर संगति साधु की, निष्फल कभी न होय | ऐसी चंदन वासना , नीम न कहसी कोय || संतों की संगत कभी निष्फल नहीं होती | मलयगिर की सुगंधी उड़कर लगने से नीम भी चन्दन हो जाता है, फिर उसे कभी कोई नीम नहीं कहता | कबीर संगत साधु की, नित प्रति कीजै जाय | दुरमति दूर बहावासी , देशी सुमति बताय || गुरु कबीर जी कहते हैं कि प्रतिदिन जाकर संतों की संगत करो | इससे तुम्हारी दुबुद्धि दूर हो जायेगी और सन्त सुबुद्धि बतला देंगे | कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय | खीर खांड़ भोजन मिलै, साकत संग न जाय || सन्त कबीर जी कहते हैं, सतों की संगत मैं, जौं की भूसी खाना अच्छा है | खीर और मिष्ठान आदि का भोजन मिले , तो भी साकत के संग मैं नहीं जाना ఇాగౌ | कबीर संगति साधु की, निष्फल कभी न होय | ऐसी चंदन वासना , नीम न कहसी कोय || संतों की संगत कभी निष्फल नहीं होती | मलयगिर की सुगंधी उड़कर लगने से नीम भी चन्दन हो जाता है, फिर उसे कभी कोई नीम नहीं कहता | - ShareChat