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#Gita gyan ##🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🙏श्री कृष्ण वचन🌹🌼Krishna Geeta Gyan 🙏bhagvat gita 📖 #🌺 कृष्ण ज्ञान 🙏 गीता वचन 🌺 भक्ति 💕 राधा कृष्ण 🙏🙏 हरि बोल 🙏🙏 #lord shri krishna # gita gyan by bhagwan shri krishna
Gita gyan - Bhagavad Gita: | Chapter 16 Verse 1-3 श्रीभगवानुवाच | अभयं सत्त्वसंशुद्धि्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः | दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ।| 1|| शान्तिरपैशुनम्। अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् ।| २|| दया शौचमद्रोहोनातिमानिता | तेजः क्षमा धृतिः भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत || ३|| परम पुरुषोत्तम भगवान् ने कहाः हे भरतवंशी ! निर्भयता , मन की शुद्धि में दृढ़ता , दान, इन्द्रियों अध्यात्मिक ज्ञान नियंत्रण , यज्ञों का अनुष्ठान करना , पर धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन , तपस्या और स्पष्टवादिता , अहिंसा , सत्यता , क्रोधहीनता , त्याग , शांतिप्रियता , दोषारोपण से मुक्त, सभी जीवों के प्रति लोभ से मुक्ति, भद्रता, करूणा का भाव लज्जा , स्थिरता , शक्ति, क्षमाशीलता , धैर्य, पवित्रता , शत्रुता के भाव से मुक्ति और प्रतिष्ठा की इच्छा से मुक्ति होना , ये से संपन्न लोगों के गुण Hfa प्रकृति हैं। Bhagavad Gita: | Chapter 16 Verse 1-3 श्रीभगवानुवाच | अभयं सत्त्वसंशुद्धि्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः | दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ।| 1|| शान्तिरपैशुनम्। अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् ।| २|| दया शौचमद्रोहोनातिमानिता | तेजः क्षमा धृतिः भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत || ३|| परम पुरुषोत्तम भगवान् ने कहाः हे भरतवंशी ! निर्भयता , मन की शुद्धि में दृढ़ता , दान, इन्द्रियों अध्यात्मिक ज्ञान नियंत्रण , यज्ञों का अनुष्ठान करना , पर धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन , तपस्या और स्पष्टवादिता , अहिंसा , सत्यता , क्रोधहीनता , त्याग , शांतिप्रियता , दोषारोपण से मुक्त, सभी जीवों के प्रति लोभ से मुक्ति, भद्रता, करूणा का भाव लज्जा , स्थिरता , शक्ति, क्षमाशीलता , धैर्य, पवित्रता , शत्रुता के भाव से मुक्ति और प्रतिष्ठा की इच्छा से मुक्ति होना , ये से संपन्न लोगों के गुण Hfa प्रकृति हैं। - ShareChat