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💝🎄💝🎄💝🎄💝 *🙏सादर वन्दे🙏* *🚩 धर्म यात्रा 🚩* *मे आज* *📍 पंढरपुर ,महाराष्ट्र📍* भारत के महाराष्ट्र राज्य के सोलापुर ज़िले में *पंढरपुर* एक नगर स्थित है। जो भीमा नदी के किनारे बसा हुआ है , इस नगर में विष्णुजी का प्रसिद्ध मन्दिर हैं । इस मन्दिर से जुड़ी हुई एक कहानी बड़ी ही अद्भुत हैं ; किवंदती के अनुसार ; पंढरपुर गाँव में पुंडलीक नाम का एक युवक रहता था । उसके वृद्ध माता पिता काफी बीमार हो गए अतएव वह उनकी सेवा कर रहा था और विपन्न अवस्था मे चल रहा था उसकी भगवान कृष्ण पर बहुत असीम श्रद्धा थी और वह भगवान कृष्ण के दर्शन की प्रबल इच्छा करता रहता था ।उसकी परम भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान रात्रि में उसके दरवाजे पर आए किन्तु वह उस समय अपने माता - पिता की सेवा में इतना लीन था कि उसे इसका भान ही न हो सका , पुंडलीक को दरवाजे से, अंदर किसी व्यक्ति के आने का जब भान हुआ तो बिना उधर देखे ही उसने पूछा कौन हो ? उस पर भगवान बोले , मैं विट्ठल हूँ , तुम्हारी सहायता करना चाहता हूँ । पुंडलीक ने फिर बिना देखे ही एक ईंट भगवान की तरफ फेंक दी और कहा कि इसी पर विश्राम करो , मैं माँ और पिता की सेवा समाप्त कर लूँ तो तुमसे आकर मिलता हूँ । माता -- पिता की सेवा में सारी रात बीत गई और सवेरा हो गया ; भगवान रात भर ईंट पर ही खड़े रहे । भगवान को बड़ी देर हो गई तो माता रुक्मणी उन्हें खोजते हुए वहाँ तक आ गई ।पुंडलीक ने यह जानकर कि कोई और व्यक्ति भी विट्ठल के साथ उनके यहाँ आया हैं , तब उनके लिए भी विश्राम हेतु एक ईंट और सरका दी ; सवेरा हो गया ।लोगो का मार्ग से निकलने का समय आ गया तब , ईंट पर खड़े हुए *विट्ठल और रुक्मणी* ने अपने आपको मूर्ति में परिवर्तित कर दिया । तब से दोनों विष्णु और रुक्मणी वहीं ईंट पर खड़े कमर पर हाथ धरे प्रतीक्षा कर रहे है कि पुंडलीक की माता - पिता की सेवा समाप्त हो और वह उनकी तरफ देखे । पुंडलीक की माता पिता पर इतनी श्रद्धा से भगवान इतने प्रसन्न हुए की सदा के लिए उस स्थान पर मूर्ति बन कर उनके पास आ गए । कोई भी कार्य पूर्ण श्रद्धा से किया जाता है तो वह प्रभु की पूजा की तरह होता है । पूर्ण श्रद्धा से अहंकार मिट जाता हैं और ऐसा होते ही सब प्रभुमय हो जाता है ।मान्यता हैं कि पंढरपुर के इस मन्दिर में वही *विट्ठल और रुक्मणीजी* की मूर्ति आज भी विराजमान है । भगवान विष्णु के अवतार , बिठोबा और उनकी पत्नी रुक्मिणी के सम्मान में इस शहर में वर्ष में चार बार त्योहार मनाए जाते हैं जहाँ साल भर करोडों हिंदू तीर्थयात्री आते हैं। जब भी आप मन्दिर में दर्शन के लिये पहुंचते है , तो सबसे पहले अपने पैरों को धो लें , इसके बाद ही मन्दिर के अंदर प्रवेश करें , मन्दिर में प्रवेश करने से पहले हमेशा सीढ़ियों/चौखट को छूकर प्रणाम करें , इसके साथ घंटी को बजाते हुए भगवान का ध्यान करें और अपने मन में बसे सभी बुरे विचारों को मन्दिर के बाहर ही छोड़कर साफ मन से आगे बढ़ें , इस तरह से मन्दिर में प्रवेश करना है। इस मन्दिर में दो प्रकार के दर्शन होते हैं - *मुख दर्शन* -- दूर से मूर्ति के केवल मुख मण्डल के दर्शन दूर से करना और *पद दर्शन* -- पद दर्शन में भक्तों को आशीर्वाद लेने के लिए भगवान के चरण स्पर्श करने की अनुमति होती है। पंढरपुर कहाँ है -- पंढरपुर की दूरी सोलापुर से 75 कि.मी. है। पंढरपुर रेलवे स्टेशन से 2 कि.मी. की दूरी पर यह मन्दिर स्थित है l पुणे से पंढरपुर जाने के लिये सड़क मार्ग से दूरी 230 कि.मी. है। दक्षिण भारत की यात्रा संपूर्ण कर मध्य प्रदेश की ओर आने वाले यात्रियों को पंढरपुर के दर्शन अवश्य करते हुए आना चाहिए । *आप भी धर्मयात्रा🚩 हेतु जुड़ सकते हैं :* *धर्मयात्रा में दी गई ये जानकारियाँ , मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहाँ यह बताना जरूरी है कि , धर्मयात्रा किसी भी तरह की मान्यता , जानकारी की पुष्टि नहीं करता है ।* *🙏शिव🙏९९९३३३९६०५* #मंदिर दर्शन 💝🎄💝🎄💝🎄💝
मंदिर दर्शन - सत नामदेच मठादवार ।। नथ नथ शन कृष्ण हर || सत नामदेच मठादवार ।। नथ नथ शन कृष्ण हर || - ShareChat