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#श्रीमद् भगवद गीता #श्रीमद भगवद गीता उपदेश 🙏🙏 ##भगवद गीता🙏🕉️ #भगवद गीता #भगवद गीता सार
श्रीमद् भगवद गीता - न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च। किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा = और  தன! # = = f4ு चाहता ಕೆ| ೯ Tifa ೯! सुखोंको ন যাতয নথা राज्यसे क्या प्रयोजन है अथवा ऐसे भोगोँसे जीवनसे भी क्या लाभ है ? Il ३२ Il येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च। त इमेउ्वस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च हमें जिनके लिये राज्य, भोग और सुखादि धन और जीवनकी अभीष्ट   हैँ, वे ही ये सब आशाको त्यागकर ఇకే గైII 33 I युद्धमें आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः | मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः सम्बन्धिनस्तथा गुरुजन, ताऊ-चाचे, लड़के और उसी प्रकार मामे, पौत्र, और   भी दादे, মাল নথা S{, सम्बन्धी लोग हैँ Il ३४ Il एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोउपि मधुसूदन। f೯ अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः महीकृते हे मधुसूदन ! मुझे मारनेपर भी अथवा तीनों लोकोंके राज्यके लिये भी मैँं इन सबको मारना नहीं चाहता; फिर पृथ्वीके लिये तो कहना ही क्या है ? II ३५ II गीता प्रेस , गोरखपुर से साभार न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च। किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा = और  தன! # = = f4ு चाहता ಕೆ| ೯ Tifa ೯! सुखोंको ন যাতয নথা राज्यसे क्या प्रयोजन है अथवा ऐसे भोगोँसे जीवनसे भी क्या लाभ है ? Il ३२ Il येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च। त इमेउ्वस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च हमें जिनके लिये राज्य, भोग और सुखादि धन और जीवनकी अभीष्ट   हैँ, वे ही ये सब आशाको त्यागकर ఇకే గైII 33 I युद्धमें आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः | मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः सम्बन्धिनस्तथा गुरुजन, ताऊ-चाचे, लड़के और उसी प्रकार मामे, पौत्र, और   भी दादे, মাল নথা S{, सम्बन्धी लोग हैँ Il ३४ Il एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोउपि मधुसूदन। f೯ अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः महीकृते हे मधुसूदन ! मुझे मारनेपर भी अथवा तीनों लोकोंके राज्यके लिये भी मैँं इन सबको मारना नहीं चाहता; फिर पृथ्वीके लिये तो कहना ही क्या है ? II ३५ II गीता प्रेस , गोरखपुर से साभार - ShareChat