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#धर्म
धर्म - शिव और कृष्ण अंतर स्थिरता अकेली हो तो शून्य है,गति अकेली हो तो दिशा खो देती है। जब स्थिरता और चेतना एक दूसरे को स्पर्श करते हैं तभी जीवन प्रेम ब्रह्मांड लय अनुभूति सब प्रकट होते हैं । शिव मौन आधार शुन्य साक्षी कृष्ण राम लीला प्रेम अनुभूति इनका मिलन नृत्य और यही नृत्य सृष्टि कहलाता है, जैसे वीणा स्थिर है स्वर कृष्ण का आधार है सागर स्थिर है लहरें कृष्ण की लीला है। आकाश स्थिर है तारों का नृत्य कृष्ण की चाल है, शिव के बिना  गतिहीन है कृष्ण के बिना शिव आधार हीन हैं। த अपके भीतर शिव ध्यान की गहराई , कृष्ण प्रेम आनंद प्रवाह | जब मन शांत होे जाता है और हृदय खुलता है तो भीतर एक दिव्य ताल बजती है बनती है, वहीं नृत्य है। जहां आप ना स्थिर है, ना गति मान बल्कि दोनों का संगम है। योग जोड़ शिव और कृष्ण का जोड़ स्थिर साक्षी + गति शील अनुभव , ना परिणाम की चिंता ना अतीत भविष्य का बोझा एक ऐसा क्षण जिसमें जीवन पूर्णता खिल जाता है। शिव का तांडव सृष्टि का ढांचा कृष्ण की रास सृष्टि का आनंद | ढांचा और आनंद मिल कर ब्रह्मांड बनाते हैं । संक्षेप में स्थिरता और चेतना का नृत्य अस्तित्व की धड़कन शिव आधार है। कृष्ण अभिव्यक्ति है दोनों के बिना जीवन अधूरा है। शिव और कृष्ण अंतर स्थिरता अकेली हो तो शून्य है,गति अकेली हो तो दिशा खो देती है। जब स्थिरता और चेतना एक दूसरे को स्पर्श करते हैं तभी जीवन प्रेम ब्रह्मांड लय अनुभूति सब प्रकट होते हैं । शिव मौन आधार शुन्य साक्षी कृष्ण राम लीला प्रेम अनुभूति इनका मिलन नृत्य और यही नृत्य सृष्टि कहलाता है, जैसे वीणा स्थिर है स्वर कृष्ण का आधार है सागर स्थिर है लहरें कृष्ण की लीला है। आकाश स्थिर है तारों का नृत्य कृष्ण की चाल है, शिव के बिना  गतिहीन है कृष्ण के बिना शिव आधार हीन हैं। த अपके भीतर शिव ध्यान की गहराई , कृष्ण प्रेम आनंद प्रवाह | जब मन शांत होे जाता है और हृदय खुलता है तो भीतर एक दिव्य ताल बजती है बनती है, वहीं नृत्य है। जहां आप ना स्थिर है, ना गति मान बल्कि दोनों का संगम है। योग जोड़ शिव और कृष्ण का जोड़ स्थिर साक्षी + गति शील अनुभव , ना परिणाम की चिंता ना अतीत भविष्य का बोझा एक ऐसा क्षण जिसमें जीवन पूर्णता खिल जाता है। शिव का तांडव सृष्टि का ढांचा कृष्ण की रास सृष्टि का आनंद | ढांचा और आनंद मिल कर ब्रह्मांड बनाते हैं । संक्षेप में स्थिरता और चेतना का नृत्य अस्तित्व की धड़कन शिव आधार है। कृष्ण अभिव्यक्ति है दोनों के बिना जीवन अधूरा है। - ShareChat