## सुंदरकांड
🕉️ सुंदर कांड: भक्ति, साहस और विजय का अनुपम अध्याय
रामायण, भारतीय संस्कृति का वह महाकाव्य है, जो युगों-युगों से मानव को धर्म, कर्तव्य और आदर्श जीवन का मार्ग दिखाता रहा है। गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस का पाँचवाँ अध्याय, 'सुंदर कांड' भक्ति, साहस और आत्मविश्वास की एक अद्वितीय गाथा है। यह एकमात्र ऐसा कांड है, जिसका केंद्रबिंदु भगवान राम के बजाए उनके परम भक्त, श्री हनुमान जी हैं, और इसी कारण यह भक्तों के बीच विशेष रूप से पूजनीय है।
📜 सुंदर कांड का सार (Summary)
'सुंदर कांड' का अर्थ है 'सुंदर अध्याय'। इसकी सुंदरता हनुमान जी के चरित्र, उनकी निष्ठा और उनकी विजय में निहित है।
1. शक्ति का जागरण और संकल्प
सीता माता की खोज के लिए जब सभी वानर निराश हो जाते हैं, तब जामवंत जी हनुमान जी को उनके अपार बल और क्षमताओं का स्मरण कराते हैं। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि हर व्यक्ति में सुप्त शक्तियां होती हैं, जिन्हें केवल सही प्रेरणा की आवश्यकता होती है।
जामवंत जी हनुमान जी से कहते हैं:
दोहा:
कहि रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥
पवन तनय बल पवन समाना। बुद्धि बिबेक बिग्यान निधाना॥
(अर्थ: रीछपति जामवंत ने कहा, "हे हनुमान! सुनो, तुम क्यों चुप बैठे हो? तुम तो पवन के पुत्र हो और बल में पवन के समान हो। तुम बुद्धि, विवेक और ज्ञान के भंडार हो।"
इस स्मरण के बाद, हनुमान जी विशाल समुद्र को लाँघने का संकल्प लेते हैं, जो उनके अटूट साहस और लक्ष्य के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
2. राम नाम का प्रताप और लक्ष्य की ओर
समुद्र पार करने के दौरान, हनुमान जी कई बाधाओं को अपनी बुद्धि और विनम्रता से पार करते हैं। लंका में प्रवेश करते समय वे अपने कार्य की सफलता के लिए भगवान राम का नाम हृदय में धारण करते हैं:
चौपाई:
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कौसल पुर राजा॥
(अर्थ: नगर में प्रवेश करके सब काम कीजिए, पर हृदय में अयोध्या के राजा श्री रघुनाथ जी को धारण किए रहिए।) यह चौपाई दर्शाती है कि सफलता के लिए कर्म के साथ-साथ आध्यात्मिक आधार और ईश्वर पर विश्वास भी अत्यंत आवश्यक है।
3. भक्ति, पराक्रम और विजय
हनुमान जी अशोक वाटिका में शोकग्रस्त सीता जी को खोज निकालते हैं और राम की मुद्रिका देते हैं। सीता जी जब राम की अंगूठी देखती हैं, तो वह राम नाम के प्रताप को याद करती हैं:
चौपाई:
तब देखी मुद्रिका मनोहर। राम नाम अंकित अति सुंदर॥
चकित चितव मुदरी पहिचानी। हरष बिषाद हृदयँ अकुलानी॥
(अर्थ: तब (हनुमान जी ने) राम नाम से अंकित, अत्यंत सुंदर और मन को हरने वाली अंगूठी देखी। सीता जी चकित होकर अंगूठी को पहचानकर हृदय में हर्ष और विषाद से व्याकुल हो उठीं।)
इसके बाद, हनुमान जी लंका दहन कर वापस लौटते समय यह स्पष्ट कर देते हैं कि राम का कार्य पूरा होने तक उन्हें विश्राम नहीं करना है।
दोहा:
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम॥
(अर्थ: राम का काम किए बिना मुझे विश्राम कहाँ?) यह श्लोक कर्तव्यनिष्ठा की पराकाष्ठा है।
💡 समाज में इसकी उपयोगिता (Social Utility)
सुंदर कांड केवल एक धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए एक महान प्रेरणास्रोत और प्रबंधन गुरु है।
1. आत्मविश्वास और निर्भीकता
सुंदर कांड का पाठ करने वाले भक्त को यह विश्वास मिलता है कि उसके आस-पास नकारात्मक शक्ति भटक नहीं सकती। हनुमान जी का चरित्र हमें भय पर विजय पाने की प्रेरणा देता है। जो लोग भय या संकट में हैं, उनके लिए यह पाठ मानसिक संबल प्रदान करता है।
2. कर्तव्यनिष्ठा और एकाग्रता
हनुमान जी की लंका यात्रा विद्यार्थियों, उद्यमियों और पेशेवरों के लिए एक बड़ा सबक है। यह हमें सिखाता है कि लक्ष्य चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, यदि आप हनुमान जी की तरह निष्ठावान हैं और लक्ष्य के प्रति समर्पित हैं, तो सफलता निश्चित है।
हनुमान जी का प्रत्येक क्षण राम कार्य को समर्पित था, जैसा कि उपर्युक्त दोहे "राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम॥" से स्पष्ट होता है। यह कार्य के प्रति सतत समर्पण की भावना को जागृत करता है।
3. विनम्रता और विवेकपूर्ण शक्ति
हनुमान जी ने अपार बल होने के बावजूद हर जगह विनम्रता का परिचय दिया। रावण की सभा में भी उन्होंने नीति और धर्म की बात कही। शक्ति के साथ विवेक का संतुलन ही उन्हें महान बनाता है।
वे अपनी बुद्धि और बल को राम की भक्ति का परिणाम मानते हैं, जो अहंकार से मुक्त होकर सेवा करने का आदर्श प्रस्तुत करता है।
4. राम नाम की महिमा और भक्ति का बल
सुंदर कांड में भक्ति की शक्ति दिखती है। हनुमान जी की सफलता का मूल उनकी शक्ति या बुद्धि नहीं, बल्कि भगवान राम के प्रति उनकी अटूट भक्ति है।
यह सिखाता है कि सबसे बड़ा बल राम नाम में है। विभीषण ने हनुमान जी को जब पहली बार देखा तो वह तुरंत पहचान गए कि यह कोई हरि का भक्त है:
चौपाई:
की तुम्ह हरि दासन्ह महँ कोई। मोरें हृदय प्रीति अति होई॥
(अर्थ: क्या आप हरि (भगवान) के दासों में से कोई हैं? क्योंकि मेरे हृदय में आपके प्रति बहुत अधिक प्रेम उत्पन्न हो रहा है।) यह भक्त को देखकर भक्त के हृदय में प्रेम उमड़ने के महत्व को बताता है।
निष्कर्ष:
सुंदर कांड एक महाकाव्यीय रचना है जो यह सिद्ध करती है कि जीवन की हर बाधा को साहस, विनम्रता, बुद्धि और अटूट भक्ति के बल पर पार किया जा सकता है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हर काल और समाज के लिए एक प्रेरणादायक मार्गदर्शिका है जो हमें अपने भीतर की सोई हुई शक्तियों को जगाकर, राम नाम को हृदय में रखकर, अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने की ओर प्रेरित करती है।


