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#bhakti #Sanskrit Shlok #sanskrit post #🗞️30 जुलाई के अपडेट 📢 #by sameer dharmik
bhakti - एवमुक्तो   महातेजा   विश्वामित्रो   महानृषिः | प्रविवेश तदा   दीक्षां नियतो   नियतेन्द्रियः Il ३० |l तां   रात्रिमुषित्वा   सुसमाहितौ। कुमारावपि प्रभातकाले चोत्थाय संध्यामुपास्य च।l ३१।।  पूर्वा परमं   जाप्यं समाप्य   नियमेन प्रशुची च। हुताग्निहोत्रमासीनं  विश्वामित्रमवन्दताम् II ३२१।  उनके ऐसा कहनेपर महातेजस्वी महर्षि विश्वामित्र  दीक्षामें   प्रविष्ट  जितेन्द्रियभावसे   नियमपूर्वक यज्ञकी हुए। वे दोनों राजकुमार भी सावधानीके साथ रात व्यतीत करके सबेरे उठे और स्नान आदिसे शुद्ध हो प्रातःकालकी संध्योपासना तथा नियमपूर्वक सर्वश्रेष्ठ  उन्होने गायत्रीमन्त्रका जप करने लगे। जप पूरा होनेपर करके   बैठे हुए   विश्वामित्रजीके अग्रिहोत्र चरणो्म वन्दना   की।। ३०  ३२ ।। एवमुक्तो   महातेजा   विश्वामित्रो   महानृषिः | प्रविवेश तदा   दीक्षां नियतो   नियतेन्द्रियः Il ३० |l तां   रात्रिमुषित्वा   सुसमाहितौ। कुमारावपि प्रभातकाले चोत्थाय संध्यामुपास्य च।l ३१।।  पूर्वा परमं   जाप्यं समाप्य   नियमेन प्रशुची च। हुताग्निहोत्रमासीनं  विश्वामित्रमवन्दताम् II ३२१।  उनके ऐसा कहनेपर महातेजस्वी महर्षि विश्वामित्र  दीक्षामें   प्रविष्ट  जितेन्द्रियभावसे   नियमपूर्वक यज्ञकी हुए। वे दोनों राजकुमार भी सावधानीके साथ रात व्यतीत करके सबेरे उठे और स्नान आदिसे शुद्ध हो प्रातःकालकी संध्योपासना तथा नियमपूर्वक सर्वश्रेष्ठ  उन्होने गायत्रीमन्त्रका जप करने लगे। जप पूरा होनेपर करके   बैठे हुए   विश्वामित्रजीके अग्रिहोत्र चरणो्म वन्दना   की।। ३०  ३२ ।। - ShareChat