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#रामचरितमानस
रामचरितमानस - ٥٢٥٥١٥٥ श्री गुरु पद नख मनि गन ज्योति | सुमिरन दिवय दृष्टिहिय होती दलन मोह तमःसा सप्रकास बडे भाग आवड [ गुर महरज के व्णनखोकी ज्योति मणीयो के प्रकाश केसमानहै जिनके समरण करते हीदिय वृषिषत्पन हेतीहै वह प्रकाश अज्ञान रुपी अंधकार का नश का्नेवताहै वह जिमके हृदयर्मे३ जाता हैवह वडे भाग्य वाने ्हें ٥٢٥٥١٥٥ श्री गुरु पद नख मनि गन ज्योति | सुमिरन दिवय दृष्टिहिय होती दलन मोह तमःसा सप्रकास बडे भाग आवड [ गुर महरज के व्णनखोकी ज्योति मणीयो के प्रकाश केसमानहै जिनके समरण करते हीदिय वृषिषत्पन हेतीहै वह प्रकाश अज्ञान रुपी अंधकार का नश का्नेवताहै वह जिमके हृदयर्मे३ जाता हैवह वडे भाग्य वाने ्हें - ShareChat