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#Sanskrit Shlok #sanskrit post #bhakti #🗞️31 जुलाई के अपडेट 📢 #by sameer dharmik
Sanskrit Shlok - [६१ - पूर्ण आयु सूक्त ] छन्द॰  विराट् पथ्याबृहती I] [ ऋषि॰  बह्मा | देवता-  बहमणस्पति स्योनं मे सीद पुरुः पृणस्व पवमानः स्वर्गे।  ४९९५. तनूस्तन्वा मे सहे दतः सर्वमायुरशीय  हम शरीर के अंगों दाँतों की स्वस्थता सहित पूर्ण आयुष्य प्राप्त करें । हे पवमान ( अग्निदेव ! आप सुखपूर्वक हमें सुख से परिपूर्ण रखें II१  यहा प्रतिष्ठित रहें और स्वर्गलोग में हमारे  सर्वप्रिय सूक्त ] [६२ [ =fப- ஈ6 देवता- ब्रह्मणस्पति  छन्द- अनुष्टप् ] देवेषु  प्रियं राजसु मा कृणु | प्रियं सर्वस्य पश्यत उत शूद्र उतार्ये। ४९९६. प्रियं मा कृणु शूद्रों आर्यों आदि सभी दर्शकों का आप हमें देवताओं एवं राजाओं का प्रिय बनाएँ हे अग्निदेव भी प्रिय पात्र बनाएँ I।१  [ ६३- आयुवर्धन सूक्त ] छन्द- विराट् उपरिष्टाद् बृहती ] [ ऋषि॰ बह्मा | देवता- बह्मणस्पति  ४९९७. उत् तिष्ठ ब्ह्मणस्पते देवान् यज्ञेन बोधय आयुः प्राणं प्रजां पशून् कीर्ति यजमानं च वर्धय II१ I१  आप स्वयं उठकर देवशक्तियों को यज्ञीय प्रयोजनों के लिए प्रेरित करें । हे ज्ञान के स्वामी (बह्मणस्पते) प्रजा पशुधन तथा कीर्ति को भो बढ़ाएँ II१ Il आप यजमान की आयुष्य   प्राण (जीवनीशक्ति) [६१ - पूर्ण आयु सूक्त ] छन्द॰  विराट् पथ्याबृहती I] [ ऋषि॰  बह्मा | देवता-  बहमणस्पति स्योनं मे सीद पुरुः पृणस्व पवमानः स्वर्गे।  ४९९५. तनूस्तन्वा मे सहे दतः सर्वमायुरशीय  हम शरीर के अंगों दाँतों की स्वस्थता सहित पूर्ण आयुष्य प्राप्त करें । हे पवमान ( अग्निदेव ! आप सुखपूर्वक हमें सुख से परिपूर्ण रखें II१  यहा प्रतिष्ठित रहें और स्वर्गलोग में हमारे  सर्वप्रिय सूक्त ] [६२ [ =fப- ஈ6 देवता- ब्रह्मणस्पति  छन्द- अनुष्टप् ] देवेषु  प्रियं राजसु मा कृणु | प्रियं सर्वस्य पश्यत उत शूद्र उतार्ये। ४९९६. प्रियं मा कृणु शूद्रों आर्यों आदि सभी दर्शकों का आप हमें देवताओं एवं राजाओं का प्रिय बनाएँ हे अग्निदेव भी प्रिय पात्र बनाएँ I।१  [ ६३- आयुवर्धन सूक्त ] छन्द- विराट् उपरिष्टाद् बृहती ] [ ऋषि॰ बह्मा | देवता- बह्मणस्पति  ४९९७. उत् तिष्ठ ब्ह्मणस्पते देवान् यज्ञेन बोधय आयुः प्राणं प्रजां पशून् कीर्ति यजमानं च वर्धय II१ I१  आप स्वयं उठकर देवशक्तियों को यज्ञीय प्रयोजनों के लिए प्रेरित करें । हे ज्ञान के स्वामी (बह्मणस्पते) प्रजा पशुधन तथा कीर्ति को भो बढ़ाएँ II१ Il आप यजमान की आयुष्य   प्राण (जीवनीशक्ति) - ShareChat