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#ऋग्वेद #sanhita #sanskrit post #Sanskrit Shlok #by sameer dharmik
ऋग्वेद - ४२७० ऋग्वेदसंहिता म.१०अ ६सू ७३  ऋतात्। अधि। प्रउजायै। सखिभिः अर्थम्। সনসান: इन्द्रः| इषिरेभिः अगात्। उप। दस्युम्। आ। आ। आभिः| हि। मायाः मिहः| प्र। तम्राः | अवपत्। तमौसि।।५ ।। इन्द्रः ऋतात् यज्ञात् अधि इषिरेभिः गमनशीलैः सखिभिः मरुद्भिः सह मन्दमानः माद्यन् प्रजायै  এলণানা9  दस्युसंबन्धिनीर्विनाशयितुं दस्युम् उप  अर्थ धनं प्रयच्छति। स चेन्द्रः आभिः प्रजाभिर्निमित्तभूताभिः मायाः " स दस्युः तम्राः अवर्षणेन ग्लापयित्रीः मिहः प्र अवपत् व्यनाशयदित्यर्थः वृष्टीः  तमांसि. इन्द्र यज्ञ में जाने वाले मरुतों के साथ हर्षित होकर यजमान को धन देते हैं और वह इन्द्र इन बजमानों के लिए दस्यु की माया को नष्ट करने हेतु उस  पास आये। उस दस्यु ने वर्षा न होने से फल-फूलादि दस्यु के को मुरझने वाली वर्षा को तथा अन्धकार को नष्ट किया। चिद মনাসানা न्यस्मा  8ಗಾ अवाहन्निन्द्र उषसो यथानः। ऋष्वैरंगच्छः सरखिभिर्निकामैः साकं प्रतिष्ठा हृद्या जघन्थ।१६।। १इन्द्रः   गमनशीलै   अर्थम्   प्रयच्छति १  यज्ञात् प्रजायै यज्मानाय मरुद्धिः स॰ आभि॰ శెక్శ్ం माद्यन तम्   दस्युम्   निर्मायं ! ম নংস্তুনূণহীঃ कर्तुम् प्र अवपत प्रज्ञाभिः दस्योः  31r ಭn r माय।ः उप ग्लापयित्रीः, तमासि নামম मायाः Ik 0 ४२७० ऋग्वेदसंहिता म.१०अ ६सू ७३  ऋतात्। अधि। प्रउजायै। सखिभिः अर्थम्। সনসান: इन्द्रः| इषिरेभिः अगात्। उप। दस्युम्। आ। आ। आभिः| हि। मायाः मिहः| प्र। तम्राः | अवपत्। तमौसि।।५ ।। इन्द्रः ऋतात् यज्ञात् अधि इषिरेभिः गमनशीलैः सखिभिः मरुद्भिः सह मन्दमानः माद्यन् प्रजायै  এলণানা9  दस्युसंबन्धिनीर्विनाशयितुं दस्युम् उप  अर्थ धनं प्रयच्छति। स चेन्द्रः आभिः प्रजाभिर्निमित्तभूताभिः मायाः स दस्युः तम्राः अवर्षणेन ग्लापयित्रीः मिहः प्र अवपत् व्यनाशयदित्यर्थः वृष्टीः  तमांसि. इन्द्र यज्ञ में जाने वाले मरुतों के साथ हर्षित होकर यजमान को धन देते हैं और वह इन्द्र इन बजमानों के लिए दस्यु की माया को नष्ट करने हेतु उस  पास आये। उस दस्यु ने वर्षा न होने से फल-फूलादि दस्यु के को मुरझने वाली वर्षा को तथा अन्धकार को नष्ट किया। चिद মনাসানা न्यस्मा  8ಗಾ अवाहन्निन्द्र उषसो यथानः। ऋष्वैरंगच्छः सरखिभिर्निकामैः साकं प्रतिष्ठा हृद्या जघन्थ।१६।। १इन्द्रः   गमनशीलै   अर्थम्   प्रयच्छति १  यज्ञात् प्रजायै यज्मानाय मरुद्धिः स॰ आभि॰ శెక్శ్ం माद्यन तम्   दस्युम्   निर्मायं ! ম নংস্তুনূণহীঃ कर्तुम् प्र अवपत प्रज्ञाभिः दस्योः  31r ಭn r माय।ः उप ग्लापयित्रीः, तमासि নামম मायाः Ik 0 - ShareChat