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#sanskrit post #Sanskrit Shlok #🗞️31 जुलाई के अपडेट 📢 #bhakti #by sameer dharmik
sanskrit post - 104- कर्मभिः शुचिभिर्देवि शुद्धात्मा विजितेन्द्रियः शूद्रोडपि द्विजवत् सेव्य इति ब्रह्माब्रवीत् स्वयम् II ४८ ।। देवि! शूद्र भी यदि जितेन्द्रिय होकर पवित्र कर्मोके अनुष्ठानसे अपने अन्तःकरणको ब्रह्माजीका कथन शुद्ध बना लेता है, वह द्विजकी ही भाति सेव्य होता है॰ यह साक्षात् ह।। ४८ ।। कर्म च शुभं यत्र शूद्रेडपि तिष्ठति स्वभावः विशिष्टः स द्विजातेर्वै विज्ञेय इति मे मतिः ।। ४९ ।। मेरा तो ऐसा विचार है कि यदि शूद्रके स्वभाव और कर्म दोनों ही उत्तम हों तो वह द्विजातिसे भी बढ़कर माननेयोग्य है ।। ४९ ।। न योनिर्नापि संस्कारो न श्रुतं न च संततिः 104- कर्मभिः शुचिभिर्देवि शुद्धात्मा विजितेन्द्रियः शूद्रोडपि द्विजवत् सेव्य इति ब्रह्माब्रवीत् स्वयम् II ४८ ।। देवि! शूद्र भी यदि जितेन्द्रिय होकर पवित्र कर्मोके अनुष्ठानसे अपने अन्तःकरणको ब्रह्माजीका कथन शुद्ध बना लेता है, वह द्विजकी ही भाति सेव्य होता है॰ यह साक्षात् ह।। ४८ ।। कर्म च शुभं यत्र शूद्रेडपि तिष्ठति स्वभावः विशिष्टः स द्विजातेर्वै विज्ञेय इति मे मतिः ।। ४९ ।। मेरा तो ऐसा विचार है कि यदि शूद्रके स्वभाव और कर्म दोनों ही उत्तम हों तो वह द्विजातिसे भी बढ़कर माननेयोग्य है ।। ४९ ।। न योनिर्नापि संस्कारो न श्रुतं न च संततिः - ShareChat