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#श्रीमद्भागवत गीता ज्ञान 🌍🌍🌍🌍🌍🌍🌍🌍🌍🌍🌍 🚩 *🙏🏻जय श्री राधेकृष्णा सुप्रभातम्🙏🏻🚩*🔅🔱🌙 *श्री मद्भगवद्गीता🌞🔱🏛* *पोस्ट संख्या :-* 6⃣4⃣8⃣ 📖 *अध्याय -१८* *अथाष्टादशोSध्याय:* *मोक्षसन्न्यासयोग* *⇩⇩⇩* *श्रीमद्भगवद्गीताकी महिमा (६७-७८)🕉* ➖➖➖➖➖➖➖➖ *श्लोक :-(१८/७५)* 📖 *व्यासप्रसादाच्छ्रुतवानेतद्गुह्यमहं परम्।* *योगं योगेश्वरात्कृष्णात्साक्षात्कथयत: स्वयम्॥ ७५॥* ➖➖➖➖➖➖➖➖ *भावार्थ:-( १८/७५ )*📚 *व्यासजी की कृपा से मैंने स्वयं इस परम गोपनीय योग (गीता-ग्रन्थ)-को कहते हुए साक्षात् योगेश्वर भगवान् श्री कृष्ण से सुना है।* ➖➖➖➖➖➖➖➖ *व्याख्या परम श्रद्धैय श्री स्वामी रामसुखदास जी महाराज :-📝( १८/७५ )*👇 'व्यासप्रसादात् श्रुतवान्’— *संजय ने जब भगवान् श्रीकृष्ण और महात्मा अर्जुन का पूरा संवाद सुना, तब वे बड़े प्रसन्न हुए। अब उसी प्रसन्नता में वे कह रहे हैं कि ऐसा परम गोपनीय योग मैंने भगवान् व्यासजी की कृपा से सुना! व्यासजी की कृपा से सुनने का तात्पर्य यह है कि भगवान्ने* 'यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया’ (१०। १), 'इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्’ (१८। ६४), 'मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे’ (१८। ६५), 'अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:’ (१८। ६६) आदि-आदि *प्यारे वचनों से अपना हृदय खोलकर अर्जुन से जो बातें कही हैं, उन बातों को सुनने में केवल व्यासदेवजी की कृपा ही है अर्थात् वे सब बातें मैंने व्यासजी की कृपा से ही सुनी हैं।* 'एतद् गुह्यं परं योगम्’— *समस्त योगों के महान् ईश्वर के द्वारा कहा जाने से यह गीता शास्त्र* 'योग’ *अर्थात् योगशास्त्र है। यह गीता शास्त्र अत्यन्त श्रेष्ठ और गोपनीय है। इसके समान श्रेष्ठ और गोपनीय दूसरा कोई संवाद देखने-सुनने में नहीं आता।* *जीव का भगवान्के साथ जो नित्य-सम्बन्ध है, उसका नाम* 'योग’ *है। उस नित्ययोग की पहचान कराने के लिये कर्मयोग, ज्ञानयोग आदि योग कहे गये हैं। उन योगों के समुदाय का वर्णन गीता में होने से गीता भी* 'योग’ *अर्थात् योगशास्त्र है।* 'योगेश्वरात्कृष्णात्साक्षात्कथयत: स्वयम्’— *संजय के आनन्द की कोई सीमा नहीं रही है। इसलिये वे हर्षोल्लास में भरकर कह रहे हैं कि इस योग को मैंने समस्त योगों के महान् ईश्वर साक्षात् भगवान् श्रीकृष्ण के मुख से सुना है। संजय को 'योगेश्वरात्, कृष्णात्, साक्षात्, कथयत:, स्वयम्’—ये पाँच शब्द कहने की क्या आवश्यकता थी? संजय इन शब्दों का प्रयोग करके यह कहना चाहते हैं कि मैंने यह संवाद परम्परा से नहीं सुना है और किसी ने मुझे सुनाया हो—ऐसी बात भी नहीं है; इसको तो मैंने खुद भगवान् के कहते-कहते सुना है!* *परिशिष्ट भाव—अर्जुन ने* 'त्वत्प्रासादात्’ *कहा है (१८। ७३) और संजय ने 'व्यासप्रसादात्’ कहा है। अर्जुन को भगवान्की कृपा से दिव्य 👁 दृष्टि मिली थी और संजय को व्यासजी की कृपा से।* *_🙏🌷 जय श्री कृष्ण 🌷🙏_* ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ *कल पढ़िए श्लोक 📖* 1⃣8⃣-7⃣6⃣ ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ 🌐🌐🌐🌐🌐🌐🌐🌐🌐🌐🌐
श्रीमद्भागवत गीता ज्ञान - व्यासप्रसादाच्छ्रुतवानेतद्गुह्यमहं परम्। योगं योगेश्वरात्कृष्णात्साक्षात्कथयतः स्वयम्।। ७५।I व्यासजी की कृपा से मैंने स्वयं इस परम गोपनीय योग (गीता ग्रन्थ)- को कहते हुए साक्षात् योगेश्वर भगवानू श्री कुष्ण से सुना है। परम श्रद्धैय श्री स्वामी रामसुखदास जी महाराज श्रीमद्रगवद्गीता साधक सजीवनी ( १८ / ७५ ) व्यासप्रसादाच्छ्रुतवानेतद्गुह्यमहं परम्। योगं योगेश्वरात्कृष्णात्साक्षात्कथयतः स्वयम्।। ७५।I व्यासजी की कृपा से मैंने स्वयं इस परम गोपनीय योग (गीता ग्रन्थ)- को कहते हुए साक्षात् योगेश्वर भगवानू श्री कुष्ण से सुना है। परम श्रद्धैय श्री स्वामी रामसुखदास जी महाराज श्रीमद्रगवद्गीता साधक सजीवनी ( १८ / ७५ ) - ShareChat