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#📒 मेरी डायरी #📖 कविता और कोट्स✒️ #👍स्पेशल शायरी🖋 #💞Heart touching शायरी✍️ #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️
📒 मेरी डायरी - अपनी आँखों में कई ख़्वाब सजाने वाले। रो पडे़ बैठ के चुपचाप कमाने वाले। आँख भर आती है जब गाँव का ज़िक्र आता है शहर की भीड़ में हर ख़्वाब गंवाने वाले। अपनी चाहत का कभी नाम न आया लब पर अपनों की आस में अरमान मिटाने वाले। भूल जाते हैं वो त्योहार की रौनक़ क्या है, ईद दीवाली में भी काम पे जाने वाले। [ अज़हर साबरी ~ 0 अपनी आँखों में कई ख़्वाब सजाने वाले। रो पडे़ बैठ के चुपचाप कमाने वाले। आँख भर आती है जब गाँव का ज़िक्र आता है शहर की भीड़ में हर ख़्वाब गंवाने वाले। अपनी चाहत का कभी नाम न आया लब पर अपनों की आस में अरमान मिटाने वाले। भूल जाते हैं वो त्योहार की रौनक़ क्या है, ईद दीवाली में भी काम पे जाने वाले। [ अज़हर साबरी ~ 0 - ShareChat