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parmod. Chavat - Author on ShareChat
parmod. Chavat
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#🙏 जय रविदास जी 👏🙇
घुरुदेव गुरुदेव जय धन संत   शिरोमणि गुरू रविदास जी मह्ाराज का परिचय संत रविदास ( रैदास ) नाम रैनास उपनाम সবলিন সান্সনা গনুমাং 1398 { जनम गोवर्धनपुर, सीर वाराणसी ( उत्तर प्रदेश ) जन्म स्थान সবলিন মান্সনা গনুমাং 1528 $ मृत्यु वाराणसी मृत्य स्थान सन्तोख दास ( रघु दास नाम भी मिलता है) এিনা कलसा देवी ( करमा देवी नाम भी मिलता है) माता मीराबाई शिष्या निर्गुण भक्त মদিন ப9 चर्मकार ( रविदासिया परंपरा में पूजनीय संत) समाज प्रचलित परंपरा के अनुसार स्वामी रामानंद गुरू মন, কবি, মমাত মুখাক, কারয दार्शनिक एवं आध्यात्मिक गुरू गोवर्धनपुर सीर धाम . चाराणसी अवधी , पूर्वी हिर्रदी तथा लोकभाषाएँ चज भाया (जन्म स्थान  सामान्य परिचय संत शिरोमणि गुरू रविदास जी महाराज मध्यकालीन भारत के महान संत, सुधारक और निर्गुण भक्ति आंदोलन के प्रमुख में से एक थे। प्रवर्तकों  समाज उन्हाँने मानव समानता , प्रेम , करूणा , सत्य, सदाचार और ईश्वर - भक्द का संदेश  दिया। वे जाति -पाँति, ऊँच-नीच, छुआछूत, आडंबर और बाहय़ कर्मकांड के विरोधी थे तथा मन की पवित्रता को ही सच्ची भक्ति का आधार मानते थे। पेशा : संत , दार्शनिक , समाज सुधारक और मोची उनकी वाणी अत्यंत सरल , सहज और जनभाषा में रची गई है, जिसमें उपमा और रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग मिलता है उनकी अनेक रचनाएँ गुरू ग्रंथ साहिब में भी संकलित हैं। उनके आदर्श आज भी सामाजिक समरसता , मानवता और आध्यात्मिक जीवन के प्रेरणास्रोत हैं। मीराबाई शिष्या मन चंगा तो GURU GRAITH SAHID  ক্রনীনী ম ঠাঁঠাা |" भावार्थ : यदि मन निर्मल , पवित्र और प्रभु - भक्ति से परिपूर्ण है॰ तो ईश्वर की कूपा हर स्थान पर गुरू ग्रंथ साहिब में संकलित वाणी प्राप्त हो सकती है। जाति नहीं , कर्म महान बनाते हैं। संदेश प्रेम , सेवा और भक्ति ही मनुष्य का सच्चा धर्म है | घुरुदेव गुरुदेव जय धन संत   शिरोमणि गुरू रविदास जी मह्ाराज का परिचय संत रविदास ( रैदास ) नाम रैनास उपनाम সবলিন সান্সনা গনুমাং 1398 { जनम गोवर्धनपुर, सीर वाराणसी ( उत्तर प्रदेश ) जन्म स्थान সবলিন মান্সনা গনুমাং 1528 $ मृत्यु वाराणसी मृत्य स्थान सन्तोख दास ( रघु दास नाम भी मिलता है) এিনা कलसा देवी ( करमा देवी नाम भी मिलता है) माता मीराबाई शिष्या निर्गुण भक्त মদিন ப9 चर्मकार ( रविदासिया परंपरा में पूजनीय संत) समाज प्रचलित परंपरा के अनुसार स्वामी रामानंद गुरू মন, কবি, মমাত মুখাক, কারয दार्शनिक एवं आध्यात्मिक गुरू गोवर्धनपुर सीर धाम . चाराणसी अवधी , पूर्वी हिर्रदी तथा लोकभाषाएँ चज भाया (जन्म स्थान  सामान्य परिचय संत शिरोमणि गुरू रविदास जी महाराज मध्यकालीन भारत के महान संत, सुधारक और निर्गुण भक्ति आंदोलन के प्रमुख में से एक थे। प्रवर्तकों  समाज उन्हाँने मानव समानता , प्रेम , करूणा , सत्य, सदाचार और ईश्वर - भक्द का संदेश  दिया। वे जाति -पाँति, ऊँच-नीच, छुआछूत, आडंबर और बाहय़ कर्मकांड के विरोधी थे तथा मन की पवित्रता को ही सच्ची भक्ति का आधार मानते थे। पेशा : संत , दार्शनिक , समाज सुधारक और मोची उनकी वाणी अत्यंत सरल , सहज और जनभाषा में रची गई है, जिसमें उपमा और रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग मिलता है उनकी अनेक रचनाएँ गुरू ग्रंथ साहिब में भी संकलित हैं। उनके आदर्श आज भी सामाजिक समरसता , मानवता और आध्यात्मिक जीवन के प्रेरणास्रोत हैं। मीराबाई शिष्या मन चंगा तो GURU GRAITH SAHID  ক্রনীনী ম ঠাঁঠাা |" भावार्थ : यदि मन निर्मल , पवित्र और प्रभु - भक्ति से परिपूर्ण है॰ तो ईश्वर की कूपा हर स्थान पर गुरू ग्रंथ साहिब में संकलित वाणी प्राप्त हो सकती है। जाति नहीं , कर्म महान बनाते हैं। संदेश प्रेम , सेवा और भक्ति ही मनुष्य का सच्चा धर्म है |
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