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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - राज्यपाल, सीएम व शिक्षामंत्री को भेजा प्रस्ताव सिंधी समाज की नईपीढ़ी को संस्कार सिखाने की पहल व श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ को सिलेबस में शामिल करने की १०५ आश्रमों ने उठाई आवाज जयपुर में है मुख्यालय, पाक की मिट्टी आज भी सुरक्षित भास्करन्यू | जयपर सिंधी समाज ने अपनी सांस्कृतिक और विभाजन के बाद स्वामी के उत्तराधिकारी स्वामी सर्वानंद महाराज ने आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी तक खास बात यह है जंयपुर में ` श्री अमरापुर दरबार ' का निर्माण करवाया " पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कि इस आश्रम में सिंध के टण्डेआदम और खंडू गांव की रज ( पकि समाज के आराध्य आचार्य सतगुरु आज भी दर्शनार्थ रखी है। यही स्वामीजी का समाधि र्थल श्ो মিভী ) स्वामी टेऊंरामजी महाराज के प्रमुख है, जहां रोज हजारों श्रद्धालु मत्था टेकते हैं। ग्रंथ ` श्री प्रेम प्र्काश को स्कूल कॉलेज के हिंदी पाठ्यक्रम में शमिल करने की खास बातें जौ ग्रंथ को बनाती हैं विशेष मुहिम शुरू की है। इस ग्रंथ को वेदों शांति दोहे और करीब ३०० पृष्ठों का विस्तृत 60 250 और शस्त्रों का सार माना जाता है। ब्रह्मदर्शनी पद्य। समाज के देश विदेश के १०५ आश्रमों आध्यात्मिक ग्रंथ। ম বীহানলী;   নয়হনী लगभग १५०० दोहे, ८०० पद्य 79 से मांग उठी है कि॰ डिब वाले सांई ५०० छंद, ३०० कवित शामिल। और १६ शिक्षारं प्रमुख शग। के जीवन दर्शन और १६ शिक्षाओं को प्रेमप्रकाश ग्रंथ पढ्ते हुए १६ शिक्षाओं में जीवन का सार २००० भजन और १०८ श्लोक सिलेबस में शामिल किया जाए। स्वामी सर्वानंद महाराज। वेद पुराणों का ज्ञान समाहिता  स्वामी टेऊंरम का जन्म विक्रम संवत माला का संकलन। में सिंध प्रदेश के खंडू गांव में स्वामी टेऊंरामजी महाराज का 1944 श्री प्रेम प्रकाश पंय और सतनाभ साक्षीं फाळे सस्ापर स्ाभीटेऊताजो सिंधु नदी के तट पर हुआ था। पंडितों साहित्य केवल धर्म नहीं, बल्कि की वाणी को घर -घर पहुंचाने के लिए समाज ने शैक्षणिळ मुहिम तेतारलोहै। ने उनके जन्म के समय ही भविष्यवाणी जीवन जीने की कला है। इसे सिंध में रेतीले टीलों पर दरबार बनाने के कारणउन्हें डिब वाले साई ठेनामरे की थी कि यह बालक साक्षात अवतार में शामिल करने ঘান্বাব ক্ীনী ক্ষ  নমিল ख्याति मिली। वर्तमान में उज्जैन में उनके  परघटओर कईशहरों मे मम নাম होेगा। महज 6 साल की उम्र में उन्होंने येक्षा फिलेगी। -संत मौनू साई बने हैं। अमरापुर स्थानों पर संचालित गोशालाओं भें २५० गोवत लो Hगओh अक्षर को कंठस्थ कर लिया था 0० श्रदापूर्वळ जरी है॰ चटनी' की अनूठी परपरा अजभी ओर १४ साल की आयु में भक्त मार्ग  ढोदान पसाद में হলো अमरापुरा I 4I राज्यपाल, सीएम व शिक्षामंत्री को भेजा प्रस्ताव सिंधी समाज की नईपीढ़ी को संस्कार सिखाने की पहल व श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ को सिलेबस में शामिल करने की १०५ आश्रमों ने उठाई आवाज जयपुर में है मुख्यालय, पाक की मिट्टी आज भी सुरक्षित भास्करन्यू | जयपर सिंधी समाज ने अपनी सांस्कृतिक और विभाजन के बाद स्वामी के उत्तराधिकारी स्वामी सर्वानंद महाराज ने आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी तक खास बात यह है जंयपुर में ` श्री अमरापुर दरबार ' का निर्माण करवाया " पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कि इस आश्रम में सिंध के टण्डेआदम और खंडू गांव की रज ( पकि समाज के आराध्य आचार्य सतगुरु आज भी दर्शनार्थ रखी है। यही स्वामीजी का समाधि र्थल श्ो মিভী ) स्वामी टेऊंरामजी महाराज के प्रमुख है, जहां रोज हजारों श्रद्धालु मत्था टेकते हैं। ग्रंथ ` श्री प्रेम प्र्काश को स्कूल कॉलेज के हिंदी पाठ्यक्रम में शमिल करने की खास बातें जौ ग्रंथ को बनाती हैं विशेष मुहिम शुरू की है। इस ग्रंथ को वेदों शांति दोहे और करीब ३०० पृष्ठों का विस्तृत 60 250 और शस्त्रों का सार माना जाता है। ब्रह्मदर्शनी पद्य। समाज के देश विदेश के १०५ आश्रमों आध्यात्मिक ग्रंथ। ম বীহানলী;   নয়হনী लगभग १५०० दोहे, ८०० पद्य 79 से मांग उठी है कि॰ डिब वाले सांई ५०० छंद, ३०० कवित शामिल। और १६ शिक्षारं प्रमुख शग। के जीवन दर्शन और १६ शिक्षाओं को प्रेमप्रकाश ग्रंथ पढ्ते हुए १६ शिक्षाओं में जीवन का सार २००० भजन और १०८ श्लोक सिलेबस में शामिल किया जाए। स्वामी सर्वानंद महाराज। वेद पुराणों का ज्ञान समाहिता  स्वामी टेऊंरम का जन्म विक्रम संवत माला का संकलन। में सिंध प्रदेश के खंडू गांव में स्वामी टेऊंरामजी महाराज का 1944 श्री प्रेम प्रकाश पंय और सतनाभ साक्षीं फाळे सस्ापर स्ाभीटेऊताजो सिंधु नदी के तट पर हुआ था। पंडितों साहित्य केवल धर्म नहीं, बल्कि की वाणी को घर -घर पहुंचाने के लिए समाज ने शैक्षणिळ मुहिम तेतारलोहै। ने उनके जन्म के समय ही भविष्यवाणी जीवन जीने की कला है। इसे सिंध में रेतीले टीलों पर दरबार बनाने के कारणउन्हें डिब वाले साई ठेनामरे की थी कि यह बालक साक्षात अवतार में शामिल करने ঘান্বাব ক্ীনী ক্ষ  নমিল ख्याति मिली। वर्तमान में उज्जैन में उनके  परघटओर कईशहरों मे मम নাম होेगा। महज 6 साल की उम्र में उन्होंने येक्षा फिलेगी। -संत मौनू साई बने हैं। अमरापुर स्थानों पर संचालित गोशालाओं भें २५० गोवत लो Hगओh अक्षर को कंठस्थ कर लिया था 0० श्रदापूर्वळ जरी है॰ चटनी' की अनूठी परपरा अजभी ओर १४ साल की आयु में भक्त मार्ग  ढोदान पसाद में হলো अमरापुरा I 4I - ShareChat