सुनील जैन
ShareChat
click to see wallet page
@350327738
350327738
सुनील जैन
@350327738
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - ೧9- 0(91 भारत ने रिस्पॉन्सिबल नेशंस  इंडेक्स लॉन्च दुनिया के जिम्मेदार देशों में भारत १६वें स्थान अमेरिका - {; चीन टॉप ५० में भी नहीं नई दिल्ली मंगलवार 7 भारत डॉ॰ अंबेडकर को सेंटर इंटरनेशनल #   বিসপোন্সিনল   নহাস  इंडेक्स ( आरएनआई ) किया। लॉन्च इंडेक्स वर्ल्ड যঙ্ক इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन के तहत तैयार किया T है। इसका उद्देश्य देशों को नैतिक शासन, सामाजिक वैश्विक जिम्मेदारी जैसे मानकों पर आंकना कल्याण , है। कार्यक्रम में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि थे। इस दौरान ' मानव कल्याण से वैश्विक नेतृत्व  तकः २१वीं सदी में जिम्मेदारी , समृद्धि व शांति की नई परिभाषा ' विषय पर चर्चा हुई। १५वें वित्त आयोग के और वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन सिंह अध्यक्ष एनके के संस्थापक और सचिव सुधांशु मित्तल भी मौजूद थे। इंडेक्स रिपोर्टः सिंगापुर सबसे अव्वल कार्यक्रम में जारी रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स रिपोर्ट में जेएनयू व आईआईएम मुंबई का योगदान रहा। यह इंडेक्स  तीन साल की शोध प्रक्रिया का नतीजा है। " रिपोर्ट में स्थान है। सिंगापुर  164 पहले व भारत अमेरिका ६६वें स्थान पर है। चीन ६८वें व पाकिस्तान  काफी नीचे ९०वें स्थान पर है। 7ಞY<3 ೧9- 0(91 भारत ने रिस्पॉन्सिबल नेशंस  इंडेक्स लॉन्च दुनिया के जिम्मेदार देशों में भारत १६वें स्थान अमेरिका - {; चीन टॉप ५० में भी नहीं नई दिल्ली मंगलवार 7 भारत डॉ॰ अंबेडकर को सेंटर इंटरनेशनल #   বিসপোন্সিনল   নহাস  इंडेक्स ( आरएनआई ) किया। लॉन्च इंडेक्स वर्ल्ड যঙ্ক इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन के तहत तैयार किया T है। इसका उद्देश्य देशों को नैतिक शासन, सामाजिक वैश्विक जिम्मेदारी जैसे मानकों पर आंकना कल्याण , है। कार्यक्रम में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि थे। इस दौरान ' मानव कल्याण से वैश्विक नेतृत्व  तकः २१वीं सदी में जिम्मेदारी , समृद्धि व शांति की नई परिभाषा ' विषय पर चर्चा हुई। १५वें वित्त आयोग के और वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन सिंह अध्यक्ष एनके के संस्थापक और सचिव सुधांशु मित्तल भी मौजूद थे। इंडेक्स रिपोर्टः सिंगापुर सबसे अव्वल कार्यक्रम में जारी रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स रिपोर्ट में जेएनयू व आईआईएम मुंबई का योगदान रहा। यह इंडेक्स  तीन साल की शोध प्रक्रिया का नतीजा है। " रिपोर्ट में स्थान है। सिंगापुर  164 पहले व भारत अमेरिका ६६वें स्थान पर है। चीन ६८वें व पाकिस्तान  काफी नीचे ९०वें स्थान पर है। 7ಞY<3 - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - देश में जयपुर सबसे पसंदीदा स्थान, विदेश में थाईलैंड बना पसंद पहली र टॉप 5 घरेलू डेस्टिनेशंस इंटरनेशनल डेस्टिनेशंस इस साल गणतंत्र दिवस गुरुग्राम सोमवार को पड़ने से लंबा वीकेंड बन గౌ रैंक रैंक 2025 2026 కే रहा है। इसका असर ट्रैवल बुकिंग पर 2025 2026 थायलैंड गोवा Tar यूएई साफ देखा जा रहा है। मेक माई ट्रिप के 1 थायलैंड यूएई उदयपुर 2 जयपुर 5 मुताबिक, २३ से २६ जनवरी २०२६ 2 सिंगापुर নিমননাম मनालर 3 के बीच ट्रैवल बुकिंग में पिछले साल 3 जयपुर గా সনালী की तुलना 7 মলহিিমা মলহিমা 4 = में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। 4 पांडिचेरी सिंगापुर  सऊदी अरब 5 मुन्नार २०२५ में २६ जनवरी रविवार को थी, 7 5 3 इसलिए लंबा वीकेंड नहीं बन पाया अध्यात्मिक यात्रा की बढ़ी नोटः वियतनाम जो कि २०२५ में था। रिपोर्ट के अनुसार, लोगों ने इस मांगः पुरी, वाराणसी , अमृतसर , 7 १०वें स्थान पर था और २०२६ में लंबे वीकेंड का पूरा फायदा उठाने के अयोध्या, तिरुपति जैसे धार्मिक 7 तीसरा सबसे पसंदीदा अंतर्राष्ट्रीय लिए पहले से ही प्लानिंग कर ली थी। शहरों में यात्रियों की मांग बढ़ी है। गंतव्य बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, घूमने के लिहाज # ೫ ೫7 Tar घूमने अब भी प्रमुख मेट्रो शहरों से टॉप 5 डेस्टिनैशन जाने वालों के लिए सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन बना हुआ है। वहीं दूसरी देश के पांच मेट्रो शहरों से लोग इन डेस्टिनेशंस पर जाना  पसंद कर रहे हैं॰ ओर , इंटरनेशनल ट्रैवल में लोग ऐसे दिल्लीः गोवा, जयपुर, ऋषिकेश, मसूरी, गोवा लोनावला, अलीबाग महाबलेश्यसुर देशों को चुन रहे हैं जहां वीसा मिलना बूँगर्लुरगो कर्जत आसान है। सीधी फ्लाइट है। थाईलैंड गोवा, मैसूर, कुर्ग, पांडिचेरी, वायनाड इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। ব্রাতিলিয;  कोलकाताः मंदारमणि , दीघा, गोवा,  शांतिनिकेतन देश में जयपुर सबसे पसंदीदा स्थान, विदेश में थाईलैंड बना पसंद पहली र टॉप 5 घरेलू डेस्टिनेशंस इंटरनेशनल डेस्टिनेशंस इस साल गणतंत्र दिवस गुरुग्राम सोमवार को पड़ने से लंबा वीकेंड बन గౌ रैंक रैंक 2025 2026 కే रहा है। इसका असर ट्रैवल बुकिंग पर 2025 2026 थायलैंड गोवा Tar यूएई साफ देखा जा रहा है। मेक माई ट्रिप के 1 थायलैंड यूएई उदयपुर 2 जयपुर 5 मुताबिक, २३ से २६ जनवरी २०२६ 2 सिंगापुर নিমননাম मनालर 3 के बीच ट्रैवल बुकिंग में पिछले साल 3 जयपुर గా সনালী की तुलना 7 মলহিিমা মলহিমা 4 = में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। 4 पांडिचेरी सिंगापुर  सऊदी अरब 5 मुन्नार २०२५ में २६ जनवरी रविवार को थी, 7 5 3 इसलिए लंबा वीकेंड नहीं बन पाया अध्यात्मिक यात्रा की बढ़ी नोटः वियतनाम जो कि २०२५ में था। रिपोर्ट के अनुसार, लोगों ने इस मांगः पुरी, वाराणसी , अमृतसर , 7 १०वें स्थान पर था और २०२६ में लंबे वीकेंड का पूरा फायदा उठाने के अयोध्या, तिरुपति जैसे धार्मिक 7 तीसरा सबसे पसंदीदा अंतर्राष्ट्रीय लिए पहले से ही प्लानिंग कर ली थी। शहरों में यात्रियों की मांग बढ़ी है। गंतव्य बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, घूमने के लिहाज # ೫ ೫7 Tar घूमने अब भी प्रमुख मेट्रो शहरों से टॉप 5 डेस्टिनैशन जाने वालों के लिए सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन बना हुआ है। वहीं दूसरी देश के पांच मेट्रो शहरों से लोग इन डेस्टिनेशंस पर जाना  पसंद कर रहे हैं॰ ओर , इंटरनेशनल ट्रैवल में लोग ऐसे दिल्लीः गोवा, जयपुर, ऋषिकेश, मसूरी, गोवा लोनावला, अलीबाग महाबलेश्यसुर देशों को चुन रहे हैं जहां वीसा मिलना बूँगर्लुरगो कर्जत आसान है। सीधी फ्लाइट है। थाईलैंड गोवा, मैसूर, कुर्ग, पांडिचेरी, वायनाड इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। ব্রাতিলিয;  कोलकाताः मंदारमणि , दीघा, गोवा,  शांतिनिकेतन - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - इस लिस्ट मसबस ऊपर है। कालकाताः मदारमाण दाघा, दााजाल  , गाषा 1 (a केरल लिटरेचर फेस्ट में पहुंचीं सुनीता ने दैनिक भास्कर से कहा - विविधता ही हमारी असली ताकत भारकर ख्वास सबसे बड़ा सबक किताबों से नहीं, स्पेस से मिला - नदेश, नधर्म न सरहदें . बस गेंद सी नाजुक धरतीः वहां सारी लड़ाइयां बेमानीः विलियम्स सुनीता कोझिकोड केए शाजी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन आईएसएस ) सिर्फ   तकनीक और   महत्वाकांक्षा धरती को देखने का अनुभव बेहद नहीं बनेगा, बल्कि सहानुभूति  संवाद भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता  भावुक   और दार्शनिक  विविधता के साथ जीने की क्षमता 9TTI   ఇగ్ౌ विलियम्स ने कहा है कि जीवन का सबसे इंसानी झगड़े , सीमाओं की लड़ाइयां और से॰बनेगा। चाहे स्पेस मिशन हो॰या মনন্ধ ন নী ক্িনানী ম সিলা) विचारधाराओं की टकराहट बहुत छोटी आत्मचिंतन   दोनों के लिए 45 कल्पन संस्थानों से और न विज्ञान से। यह लगती हैं। जब हम स्पेस से धरती को सहयोग और नैतिक परिपक्वता जरूरी सबक लिटफेस्ट में प्रकाश राज के साय सुनीता।  अंतरिक्ष से धरती को देखने पर मिला। उन्होंने देखते हैं॰ तो एकता कोई नारा नर्ही, बल्कि हे॰कि॰ है। मेरा मानना सपने उतने ही बड़े बताया कि धरती ऊपर से एक चमकती हुई एक सच्चाई बन जाती है। इस नजरिए नहीं देखना चाहिए। नैतिक और होते हैं जितनी बड़ी हमारी कल्पना होती ப6` नाजुक सी गेंद की तरह दिखती है, जिसमें ने मेरे सोचने का तरीका ही बदल दिया। है। माहौल तेजी से बदल रहा है, लोग नए बौद्धिक अभ्यास है॰ जो हमें सीमाओं से कोई सीमा, कोई देश, कोई धर्म या अमीरी- विज्ञान व खोज सिर्फ तकनीकी उपलब्धि परे सोचने की क्षमता देता है। यह हमें विचार लाकर उन्हें हकीकत बना रहे हे। केरल  गरीबी का फर्क नहीं दिखता। नहीं, बॅल्कि नैतिक और बौद्धिक अभ्यास लिटरेचर सिखाता है कि हम सिर्फ अपने देश या टेक्नोलॉजी की कमी आविष्कारों  पहले भी है। यह सोचने की क्षमता देता है कि॰ फेस्ट में आईं सुनीता ने दैनिक भास्कर से धर्म के लिए नही, बल्कि पूरी मानवता के में बाधा बनती थी, पर अब टेक्ोलॉजो हम सीमाओं से परे जाकर कैसे एक साथ  कहा कि अनुभव उन्हें यह समझाने के लिए लिए सोचें। भविष्य की दुनिया टकराव कल्पना के साथ कदम मिलाकर आगे कि इंसान की असली रह सकते हैॅ। से नहीं, विज्ञान काफी और बढ़ रही है। सच यही है कि तक्त खाज अलगाव हमारी आज अंतरिक्ष यात्रा को सिर्फ तकनीकी विविधता को समझने और स्वीकार करने में और सहयोग से बनेगी। छा्त्रां और कल्पना ही सीमा है आप सोच 9950 हैं तो उसे हासिल भी कर सकते हेॅ।॰ है। पढ़िए उन्होंने और क्या कहा..: सफलता या राष्ट्रीय गौरव के रूप में युवाओं को कहना चाहती हूं- भविष्य इस लिस्ट मसबस ऊपर है। कालकाताः मदारमाण दाघा, दााजाल  , गाषा 1 (a केरल लिटरेचर फेस्ट में पहुंचीं सुनीता ने दैनिक भास्कर से कहा - विविधता ही हमारी असली ताकत भारकर ख्वास सबसे बड़ा सबक किताबों से नहीं, स्पेस से मिला - नदेश, नधर्म न सरहदें . बस गेंद सी नाजुक धरतीः वहां सारी लड़ाइयां बेमानीः विलियम्स सुनीता कोझिकोड केए शाजी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन आईएसएस ) सिर्फ   तकनीक और   महत्वाकांक्षा धरती को देखने का अनुभव बेहद नहीं बनेगा, बल्कि सहानुभूति  संवाद भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता  भावुक   और दार्शनिक  विविधता के साथ जीने की क्षमता 9TTI   ఇగ్ౌ विलियम्स ने कहा है कि जीवन का सबसे इंसानी झगड़े , सीमाओं की लड़ाइयां और से॰बनेगा। चाहे स्पेस मिशन हो॰या মনন্ধ ন নী ক্িনানী ম সিলা) विचारधाराओं की टकराहट बहुत छोटी आत्मचिंतन   दोनों के लिए 45 कल्पन संस्थानों से और न विज्ञान से। यह लगती हैं। जब हम स्पेस से धरती को सहयोग और नैतिक परिपक्वता जरूरी सबक लिटफेस्ट में प्रकाश राज के साय सुनीता।  अंतरिक्ष से धरती को देखने पर मिला। उन्होंने देखते हैं॰ तो एकता कोई नारा नर्ही, बल्कि हे॰कि॰ है। मेरा मानना सपने उतने ही बड़े बताया कि धरती ऊपर से एक चमकती हुई एक सच्चाई बन जाती है। इस नजरिए नहीं देखना चाहिए। नैतिक और होते हैं जितनी बड़ी हमारी कल्पना होती ப6` नाजुक सी गेंद की तरह दिखती है, जिसमें ने मेरे सोचने का तरीका ही बदल दिया। है। माहौल तेजी से बदल रहा है, लोग नए बौद्धिक अभ्यास है॰ जो हमें सीमाओं से कोई सीमा, कोई देश, कोई धर्म या अमीरी- विज्ञान व खोज सिर्फ तकनीकी उपलब्धि परे सोचने की क्षमता देता है। यह हमें विचार लाकर उन्हें हकीकत बना रहे हे। केरल  गरीबी का फर्क नहीं दिखता। नहीं, बॅल्कि नैतिक और बौद्धिक अभ्यास लिटरेचर सिखाता है कि हम सिर्फ अपने देश या टेक्नोलॉजी की कमी आविष्कारों  पहले भी है। यह सोचने की क्षमता देता है कि॰ फेस्ट में आईं सुनीता ने दैनिक भास्कर से धर्म के लिए नही, बल्कि पूरी मानवता के में बाधा बनती थी, पर अब टेक्ोलॉजो हम सीमाओं से परे जाकर कैसे एक साथ  कहा कि अनुभव उन्हें यह समझाने के लिए लिए सोचें। भविष्य की दुनिया टकराव कल्पना के साथ कदम मिलाकर आगे कि इंसान की असली रह सकते हैॅ। से नहीं, विज्ञान काफी और बढ़ रही है। सच यही है कि तक्त खाज अलगाव हमारी आज अंतरिक्ष यात्रा को सिर्फ तकनीकी विविधता को समझने और स्वीकार करने में और सहयोग से बनेगी। छा्त्रां और कल्पना ही सीमा है आप सोच 9950 हैं तो उसे हासिल भी कर सकते हेॅ।॰ है। पढ़िए उन्होंने और क्या कहा..: सफलता या राष्ट्रीय गौरव के रूप में युवाओं को कहना चाहती हूं- भविष्य - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - लक्ष्यराज सिंह ने १४०० से ज्यादा मटके बनवाकर बांटे गिनीज बुक में रिकॉर्ड दर्ज ؟٩ पारंपरिक शिल्प को प्रोत्साहन और जन- राजपरिवार के H उदयपुर सिंह मेवाड़ ने गुरुवार को ভাঁ लक्ष्यराज जागरूकता का सशक्त उदाहरण बना। डॉ॰ शिकारबाड़ी   में लक्ष्यराजसिंह ने यह विश्व कीर्तिमान अपने दिवंगत पिता अरविंद सिंह मेवाड़ को समर्पित ज नहितका री के करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजन बुक के निर्णायक समारोह  में   गिनीज जरिए 10না गिनीज अधिकारी ने इस विश्व कीर्तिमान का प्रमाण- बुक ٨٩٤ पत्र दिया। बता दें डॉ॰ लक्ष्यराज ऑफ ఇగకే HaIS 8 साल में शिक्षा, चिकित्सा, महिला स्वच्छता रिकॉर्ड स्थापित किया। उन्होंने मिट्टी के १४०० से अधिक पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक प्रबंधन, सेवा जैसे विषयों पर निरंतर कार्य करते बनवाकर   उन्हें UKan मटके जरूरतमंद हेँए १० गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित कर चुके ম   নিনবিল   ক্িমাা पर्यावरण   संरक्षण यह लक्ष्यराज सिंह ने १४०० से ज्यादा मटके बनवाकर बांटे गिनीज बुक में रिकॉर्ड दर्ज ؟٩ पारंपरिक शिल्प को प्रोत्साहन और जन- राजपरिवार के H उदयपुर सिंह मेवाड़ ने गुरुवार को ভাঁ लक्ष्यराज जागरूकता का सशक्त उदाहरण बना। डॉ॰ शिकारबाड़ी   में लक्ष्यराजसिंह ने यह विश्व कीर्तिमान अपने दिवंगत पिता अरविंद सिंह मेवाड़ को समर्पित ज नहितका री के करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजन बुक के निर्णायक समारोह  में   गिनीज जरिए 10না गिनीज अधिकारी ने इस विश्व कीर्तिमान का प्रमाण- बुक ٨٩٤ पत्र दिया। बता दें डॉ॰ लक्ष्यराज ऑफ ఇగకే HaIS 8 साल में शिक्षा, चिकित्सा, महिला स्वच्छता रिकॉर्ड स्थापित किया। उन्होंने मिट्टी के १४०० से अधिक पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक प्रबंधन, सेवा जैसे विषयों पर निरंतर कार्य करते बनवाकर   उन्हें UKan मटके जरूरतमंद हेँए १० गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित कर चुके ম   নিনবিল   ক্িমাা पर्यावरण   संरक्षण यह - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - SUNIL JAIN इश्वर से मिलने के लिए कुछ समय भीतर जाना ही पड़ेगा जो हर जगह गूंज रहा है, उस दिव्य शक्ति परमात्मा को समेटना ही भजन बन जाता है। भजन का सच्चा अर्थ यही है कि इसको करने वाला और सुनने वाला ध्वनि बन जाता है, मनुष्य नहीं रह जाता। जब ऐसा होता है तभी भजन का असली आनंद है। सच्चे भजन সঁকিমো লিব के किसी की आवश्यकता नहीं पड़़ती। कई लोगों ने तो बिना वाद्ययंत्र के भी सुंदर भजन गा दिए। उनकी आवाज बाहर = देती है, लेकिन ऐसे लोग बहुत गहरे अपने भीतर उतर चुके हैं। भगवान के लिए कहा जाता है कि जो हर जगह दिख रहा है, भीतर के नेत्रों से सही देखा जाताःहै। चूंकि आजकल बाहर के के प्रयोग तो इतने अधिक वैज्ञानिक हो गेए कि पूरी दुनिया देखी  जा सकती है, पर दुनिया बनाने वाला देखना हो तो भौतर ही उतरना  पड़ेगा। अब तो वर्तमान में जीने की सुविधा के नाम पर मेटा-चश्मों का भी प्रयोग खूब चल पडा। ऐसे प्रयोगों के कारण मनुष्य अत्यधिक बाहर रहने लगा, जबकि ईश्वर से मिलने के लिए कुछ समय तो भीतर जाना ही पड़ेगा। Facebook:Pt Vijayshankar Mehta SUNIL JAIN इश्वर से मिलने के लिए कुछ समय भीतर जाना ही पड़ेगा जो हर जगह गूंज रहा है, उस दिव्य शक्ति परमात्मा को समेटना ही भजन बन जाता है। भजन का सच्चा अर्थ यही है कि इसको करने वाला और सुनने वाला ध्वनि बन जाता है, मनुष्य नहीं रह जाता। जब ऐसा होता है तभी भजन का असली आनंद है। सच्चे भजन সঁকিমো লিব के किसी की आवश्यकता नहीं पड़़ती। कई लोगों ने तो बिना वाद्ययंत्र के भी सुंदर भजन गा दिए। उनकी आवाज बाहर = देती है, लेकिन ऐसे लोग बहुत गहरे अपने भीतर उतर चुके हैं। भगवान के लिए कहा जाता है कि जो हर जगह दिख रहा है, भीतर के नेत्रों से सही देखा जाताःहै। चूंकि आजकल बाहर के के प्रयोग तो इतने अधिक वैज्ञानिक हो गेए कि पूरी दुनिया देखी  जा सकती है, पर दुनिया बनाने वाला देखना हो तो भौतर ही उतरना  पड़ेगा। अब तो वर्तमान में जीने की सुविधा के नाम पर मेटा-चश्मों का भी प्रयोग खूब चल पडा। ऐसे प्रयोगों के कारण मनुष्य अत्यधिक बाहर रहने लगा, जबकि ईश्वर से मिलने के लिए कुछ समय तो भीतर जाना ही पड़ेगा। Facebook:Pt Vijayshankar Mehta - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - जैन সুনীল वोटरों ने मराठी अस्मिता की आक्रामक राजनीति को खारिज किया। गैर मराठी मतदाताओं ने भाजपा शिंदे गठबंधन को पसंद किया, क्योँकि वह मराठी मानुष, उत्तर भारतीयों और अन्य समुदायों के बीच संतुलन बनाने में सफल रहा। जैन সুনীল वोटरों ने मराठी अस्मिता की आक्रामक राजनीति को खारिज किया। गैर मराठी मतदाताओं ने भाजपा शिंदे गठबंधन को पसंद किया, क्योँकि वह मराठी मानुष, उत्तर भारतीयों और अन्य समुदायों के बीच संतुलन बनाने में सफल रहा। - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - @ सुनील नोएडा के हाईटेक एक्सपो में तकनीकी  का ढोल पीटने के साथ ही आपदा ) प्रबंधन के मॉकड्रिल का भी दिखावा  ) होता है। लेकिन हादसे के समय ड्रोन ( गोताखोर, नाव, लाइफ जैकेट, प्रशिक्षित  सब नदारद थे। स्टाफ, एक्शन प्लान ) @ सुनील नोएडा के हाईटेक एक्सपो में तकनीकी  का ढोल पीटने के साथ ही आपदा ) प्रबंधन के मॉकड्रिल का भी दिखावा  ) होता है। लेकिन हादसे के समय ड्रोन ( गोताखोर, नाव, लाइफ जैकेट, प्रशिक्षित  सब नदारद थे। स्टाफ, एक्शन प्लान ) - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - संपादकीय हर बदलाव का विरोध करना उचित नहीं है सरकार और वैज्ञानिकों के प्रयास से जीन-एडिटिंग ( जीई ) तकनीकी में असाधारण सफलता मिली है। इस वर्ष से कृषि में इसका इस्तेमाल एक क्रांति का आगाज होे सकता है। मानव जेनेटिक बीमारियोँ, जैसे सिकल सेल मेँ भी आशातीत सफलता की उम्मीद जगी है। जीन- मोडिफिकेशन ( जीएम ) और जीन एडिटिंग ( जीई ) तकनीकियों में मौलिक अंतर यह है कि पहले में बाहरी डीएनए को लक्षित जीन में डाला जाता है, जिससे उसका मूल चरित्र ही बदल जाता है। इसलिए भारत सहित दुनिया के तमाम देशों ने जीएम सीड्स को प्रतिबंधित कर रखा है। लेकिन जीई तकनीकी में देशी क्रिस्पर विधि से की जाने वाली दो प्रक्रियाओं - एसडीएन 1 व 2 को सरकार ने वैध करार दिया मौजूद  है। इसमें जीन में ही कुछ डीएनए ( जैसे धान के पौधों में पानी की अवशोषण ्क्षमता को कम करने वाले ) को हटा दिया जाता है। इस प्रक्रिया से बनाए दो नए बीज देश के किसानों के लिए हर जिले में उपलब्ध हैं। इससे ३०% उत्पादन वृद्धि की आशा है और फसल पर सूखे का असर भी नहीं होगा। इसी विधि से रोगी के खून में स्टेम सेल  में बदलाव करके उन सेल्स को खास आकृति लेने से रोकने का भी प्रयास हो रहा है। लेकिन देश में ही एक वर्ग इस तकनीकी का विरोध करने लगा है और वह इसे जीएम जैसा मान रहा है। जबकि जीई तकनीकी पर नजर रखने के লিব  भी सरकार की नियामक संस्था है। संपादकीय हर बदलाव का विरोध करना उचित नहीं है सरकार और वैज्ञानिकों के प्रयास से जीन-एडिटिंग ( जीई ) तकनीकी में असाधारण सफलता मिली है। इस वर्ष से कृषि में इसका इस्तेमाल एक क्रांति का आगाज होे सकता है। मानव जेनेटिक बीमारियोँ, जैसे सिकल सेल मेँ भी आशातीत सफलता की उम्मीद जगी है। जीन- मोडिफिकेशन ( जीएम ) और जीन एडिटिंग ( जीई ) तकनीकियों में मौलिक अंतर यह है कि पहले में बाहरी डीएनए को लक्षित जीन में डाला जाता है, जिससे उसका मूल चरित्र ही बदल जाता है। इसलिए भारत सहित दुनिया के तमाम देशों ने जीएम सीड्स को प्रतिबंधित कर रखा है। लेकिन जीई तकनीकी में देशी क्रिस्पर विधि से की जाने वाली दो प्रक्रियाओं - एसडीएन 1 व 2 को सरकार ने वैध करार दिया मौजूद  है। इसमें जीन में ही कुछ डीएनए ( जैसे धान के पौधों में पानी की अवशोषण ्क्षमता को कम करने वाले ) को हटा दिया जाता है। इस प्रक्रिया से बनाए दो नए बीज देश के किसानों के लिए हर जिले में उपलब्ध हैं। इससे ३०% उत्पादन वृद्धि की आशा है और फसल पर सूखे का असर भी नहीं होगा। इसी विधि से रोगी के खून में स्टेम सेल  में बदलाव करके उन सेल्स को खास आकृति लेने से रोकने का भी प्रयास हो रहा है। लेकिन देश में ही एक वर्ग इस तकनीकी का विरोध करने लगा है और वह इसे जीएम जैसा मान रहा है। जबकि जीई तकनीकी पर नजर रखने के লিব  भी सरकार की नियामक संस्था है। - ShareChat