सुनील जैन
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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - जयपुर नेटफ्लिक्स पर जारी टीजर के बाद उठा विरोध, नाम बदलने की मांग मनोज बाजपेयी की फिल्म ` घूसखोर पंडित पर विवाद, ब्राह्मण समाज ने जताई आपत्ति सिटी रिपोर्टर | जयपुर आपत्तिजनक है, बल्कि संवैधानिक सर्व ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय के भी खिलाफ है मूल्यों अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने कहा அ = नेटफ्लिक्स अभिनेता कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता के ने देशकी मनोज पर कि ब्राह्मण समाज बाजपेयी आगामी की फिल्म नाम पर किसी जाति या समाज को संस्कृति, शिक्षा, सामाजिक चेतना घूसखोर   पंडित' का टीजर जारी और   राष्ट्र निर्माण में ऐतिहासिक अपमानित करना स्वीकार नहीं किया होते ही विवाद खडा हो गया है। योगदान दिया है। ऐसे में इस प्रकार हमारा विरोध फिल्म जा সঞনা| फिल्म के निर्माण से नहीं , बल्कि उस सोच से नाम को लेकर ब्राह्मण के शीर्षक समाज को गुमराह करने ने कडी आपत्ति जताई है है जो जानबूझकर जाति विशेष को और आपसी सौहार्द बिगाड़ने समाज का और इसे जातिवादी मानसिकता को काम करते हैं। उन्होंने कहा कि यह कर मनोरंजन परोसने का बदनाम अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि नेटफ्लिक्स बढ़ावा देने वाला बताया है। प्रयास करती है। रामकिशोर व्यास जैसी बड़ी संस्था ने इस शीर्षक शाकदीपीय मग ब्राह्मण सभा के ने सरकार से मांग कि फिल्म के हसे कार्यकारी अध्यक्ष रामकिशोर व्यास इस शीर्षक पर तत्काल रोक लगाई पर आपत्ति नहीं जताई और जाए और भविष्य में किसी भी जाति ने कहा कि फिल्म में एक विशेष सार्वजनिक   मंच  47 दिया।   इससे को अपमानित करने वाले प्रयासों यह   संदेश எ 8 उसे जोड़कर समुदाय কা I अपराध, भ्रष्टाचार और अनैतिकता को सख्ती से रोका जाए। उन्होंने कि जातिगत अपमान को सामान्य जैसे नकारात्मक भावों से जोड़ना அHி = और   स्वीकार्य   बनाने कि यदि नेटफ्लिक्स সমাম 9া किया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं ने नाम में संशोधन नहीं किया तो करोडों लोगों की सामाजिक गरिमा विरोध और बहिष्कार किया जाएगा। पर सीधा प्रहार है। यह न केवल किया जाएगा। जयपुर नेटफ्लिक्स पर जारी टीजर के बाद उठा विरोध, नाम बदलने की मांग मनोज बाजपेयी की फिल्म ` घूसखोर पंडित पर विवाद, ब्राह्मण समाज ने जताई आपत्ति सिटी रिपोर्टर | जयपुर आपत्तिजनक है, बल्कि संवैधानिक सर्व ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय के भी खिलाफ है मूल्यों अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने कहा அ = नेटफ्लिक्स अभिनेता कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता के ने देशकी मनोज पर कि ब्राह्मण समाज बाजपेयी आगामी की फिल्म नाम पर किसी जाति या समाज को संस्कृति, शिक्षा, सामाजिक चेतना घूसखोर   पंडित' का टीजर जारी और   राष्ट्र निर्माण में ऐतिहासिक अपमानित करना स्वीकार नहीं किया होते ही विवाद खडा हो गया है। योगदान दिया है। ऐसे में इस प्रकार हमारा विरोध फिल्म जा সঞনা| फिल्म के निर्माण से नहीं , बल्कि उस सोच से नाम को लेकर ब्राह्मण के शीर्षक समाज को गुमराह करने ने कडी आपत्ति जताई है है जो जानबूझकर जाति विशेष को और आपसी सौहार्द बिगाड़ने समाज का और इसे जातिवादी मानसिकता को काम करते हैं। उन्होंने कहा कि यह कर मनोरंजन परोसने का बदनाम अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि नेटफ्लिक्स बढ़ावा देने वाला बताया है। प्रयास करती है। रामकिशोर व्यास जैसी बड़ी संस्था ने इस शीर्षक शाकदीपीय मग ब्राह्मण सभा के ने सरकार से मांग कि फिल्म के हसे कार्यकारी अध्यक्ष रामकिशोर व्यास इस शीर्षक पर तत्काल रोक लगाई पर आपत्ति नहीं जताई और जाए और भविष्य में किसी भी जाति ने कहा कि फिल्म में एक विशेष सार्वजनिक   मंच  47 दिया।   इससे को अपमानित करने वाले प्रयासों यह   संदेश எ 8 उसे जोड़कर समुदाय কা I अपराध, भ्रष्टाचार और अनैतिकता को सख्ती से रोका जाए। उन्होंने कि जातिगत अपमान को सामान्य जैसे नकारात्मक भावों से जोड़ना அHி = और   स्वीकार्य   बनाने कि यदि नेटफ्लिक्स সমাম 9া किया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं ने नाम में संशोधन नहीं किया तो करोडों लोगों की सामाजिक गरिमा विरोध और बहिष्कार किया जाएगा। पर सीधा प्रहार है। यह न केवल किया जाएगा। - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - क्या आपजानते हेॅं $fnS स्टेशनसे जापान रोजाना गुजरते हैं ३८ लाख यात्री जापान की राजधानी टोक्यो में स्थित शिनजुकु रेलवे स्टेशन दुनिया का सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन है। इस स्टेशन से होकर रोजाना औसतून ३५ से ३८ लाख लोगों का आवागमन होता है यह मेट्रो , शहरी रेल और उपनगरीय रेल सेवा का हब है। जमीन  ऊपर और नीचे 5 ష 8 तलों में स्टेशन संबंधी कार्यालय प्लेटफॉर्म , সাঁল और भूमिंगत पैदल मार्ग बने हुए हैं जिससे यह स्टेशन एक पूरे शहर जैसा प्रतीत होत़ा है। २०२२ में इसे विश्व के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन के तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। २०० दरवाजे यात्रियों के आने-जाने के लिए बने हैं हिल जैँकु स्टेशन पर। यहां ३६ प्लेटफॉर्मों से ट्रेनें संचालित क्या आपजानते हेॅं $fnS स्टेशनसे जापान रोजाना गुजरते हैं ३८ लाख यात्री जापान की राजधानी टोक्यो में स्थित शिनजुकु रेलवे स्टेशन दुनिया का सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन है। इस स्टेशन से होकर रोजाना औसतून ३५ से ३८ लाख लोगों का आवागमन होता है यह मेट्रो , शहरी रेल और उपनगरीय रेल सेवा का हब है। जमीन  ऊपर और नीचे 5 ష 8 तलों में स्टेशन संबंधी कार्यालय प्लेटफॉर्म , সাঁল और भूमिंगत पैदल मार्ग बने हुए हैं जिससे यह स्टेशन एक पूरे शहर जैसा प्रतीत होत़ा है। २०२२ में इसे विश्व के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन के तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। २०० दरवाजे यात्रियों के आने-जाने के लिए बने हैं हिल जैँकु स्टेशन पर। यहां ३६ प्लेटफॉर्मों से ट्रेनें संचालित - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - raccoook rt Vlaysuanikar Mehta பகட दीर्घकालिक सुधारों पर जौर बजट में विकास कल्याण और वित्तीय अनुशासन को महत्व दिया गया है। आयकर स्लैब में बदलाव नहीं होने से धारणा बनी है कि वेतनभोगियों को राहत नहीं दी गई। किसानों को भी एमएसपी  सहायता में बढ़ोतरी की उम्मीद थी। लेकिन और प्रत्यक्ष आय पर जोर बजट में तात्कालिक राहत के बजाय संरचनात्मक सुधारों रहा है। आलोचकों के अनुसार बजट दीर्घकालिक विकास की दिशा में है, लेकिन अल्पकालिक आकांक्षाओं को संबोधित नहीं -समीक्षा मिश्रा, जम्मू करपाया बच्चों में बढ रही हिंसक प्रवृत्ति इंटरनेट का बढ़ता उपयोग आज बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति और  असामाजिकता को बढ़ावा दे रहा है। किशोर गंभीर अपराधों में लिप्त रहे है। संयुक्त परिवारों का अभाव और अकेलापन भी इस पाए जा समस्या का प्रमुख कारण है। अमेरिका में अभिभावकों को लेकर किए गए एक अध्ययन में ७७ फीसदी पैरेंट्स ने कहा कि॰ স स्कूलों शैक्षणिक कौशल के साथ ही बच्चों को चरित्र निर्माण की शिक्षा भी दी जानी चाहिए। - साजिद अली, इंदौर , मध्य प्रदेश नौकरी नमिलने सेनिराश हो रहे अभ्यर्थी कई स्ट्रूडेंट्स सालों से कॉम्पीटिटिव एग्जाम्स दे रहे हैं लेकिन  नौकरी न मिलने से निराश हैं। महानगरों में ये विद्यार्थी होस्टल या हर महीने इन्हें पैसे पैरेंट्स  कमरों में रहते है। गांव के इलाकों के भेजते हैं लेकिन अगर कई सालों तक परीक्षाएं देने के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिलती तोवे क्या करें? कई अभ्यर्थी तो अपने सपने छोड़कर निजी कंपनियों में काम करने लगे हैं। -प्र.मुःकाळे, नासिक, महाराष्ट्र परिवारवाद पर दोहरा मानदंड क्यों? महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की विमान हादसे में मृत्यू के बनाया जाना तो ठीक है। लेकिन बाद उनकी पत्नी को उप मुख्यमंत्री क्या यह परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देता ? प्रधानमंत्री अकसर कांग्रेस परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हैं। मुख्य विपक्षी . ৭ং दल को खूब कोसा भी जाता है। लेकिन यही काम सरकार उनका दल करता है तो सब ठीक है। ऐसा दोहरा 1 32 का सहयोगी সানভ -अनिल तलवाड़, लुधियाना, पंजाब raccoook rt Vlaysuanikar Mehta பகட दीर्घकालिक सुधारों पर जौर बजट में विकास कल्याण और वित्तीय अनुशासन को महत्व दिया गया है। आयकर स्लैब में बदलाव नहीं होने से धारणा बनी है कि वेतनभोगियों को राहत नहीं दी गई। किसानों को भी एमएसपी  सहायता में बढ़ोतरी की उम्मीद थी। लेकिन और प्रत्यक्ष आय पर जोर बजट में तात्कालिक राहत के बजाय संरचनात्मक सुधारों रहा है। आलोचकों के अनुसार बजट दीर्घकालिक विकास की दिशा में है, लेकिन अल्पकालिक आकांक्षाओं को संबोधित नहीं -समीक्षा मिश्रा, जम्मू करपाया बच्चों में बढ रही हिंसक प्रवृत्ति इंटरनेट का बढ़ता उपयोग आज बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति और  असामाजिकता को बढ़ावा दे रहा है। किशोर गंभीर अपराधों में लिप्त रहे है। संयुक्त परिवारों का अभाव और अकेलापन भी इस पाए जा समस्या का प्रमुख कारण है। अमेरिका में अभिभावकों को लेकर किए गए एक अध्ययन में ७७ फीसदी पैरेंट्स ने कहा कि॰ স स्कूलों शैक्षणिक कौशल के साथ ही बच्चों को चरित्र निर्माण की शिक्षा भी दी जानी चाहिए। - साजिद अली, इंदौर , मध्य प्रदेश नौकरी नमिलने सेनिराश हो रहे अभ्यर्थी कई स्ट्रूडेंट्स सालों से कॉम्पीटिटिव एग्जाम्स दे रहे हैं लेकिन  नौकरी न मिलने से निराश हैं। महानगरों में ये विद्यार्थी होस्टल या हर महीने इन्हें पैसे पैरेंट्स  कमरों में रहते है। गांव के इलाकों के भेजते हैं लेकिन अगर कई सालों तक परीक्षाएं देने के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिलती तोवे क्या करें? कई अभ्यर्थी तो अपने सपने छोड़कर निजी कंपनियों में काम करने लगे हैं। -प्र.मुःकाळे, नासिक, महाराष्ट्र परिवारवाद पर दोहरा मानदंड क्यों? महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की विमान हादसे में मृत्यू के बनाया जाना तो ठीक है। लेकिन बाद उनकी पत्नी को उप मुख्यमंत्री क्या यह परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देता ? प्रधानमंत्री अकसर कांग्रेस परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हैं। मुख्य विपक्षी . ৭ং दल को खूब कोसा भी जाता है। लेकिन यही काम सरकार उनका दल करता है तो सब ठीक है। ऐसा दोहरा 1 32 का सहयोगी সানভ -अनिल तलवाड़, लुधियाना, पंजाब - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - -   73 साथ भोजन करने से शांति वप्रेम का माहोल बनता है जीवन में अशांति आने के अनेक रास्ते हैं पर शांति के मार्ग सीमित 8| उनमें से एक है- भोजन। अन्न भी हमें बहुत शांति पहुंचा सकता |5` का संबंध तीन बातों से हैं- बनाना, परोसना, खाना। और यदि ये ठीक हों तो पचाना आसान है। अन्न की ये तीनों प्रक्रियाएं मनुष्य को शांत कर सकती हैं। अब तो मनोवैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि साथ बैठकर जो लोग भोजन करते हैं उनके परिवारों में शांति और प्रेम का वातावरण बनता ही है। नए प्रयोग इस बात के हो रहे हैं- जिसको वेल बीइंग थ्रू कुकिंग कहते हैं- कि यदि कोई एकन्दो सदस्य भोजन बना रहे हों तो दो-चार को और उसमें जुट जाना चाहिए। बनते हुए भोजन को जितने हाथों का साथ मिलेगा , भोजन में उतना ही आनंद आएगा। आज एकल खाने की वृत्ति बढ गई है। लेकिन सिंगल डाइनर्स आगे जाकर अपने को अशांत पाएंगे। हमारे यहां सभी धार्मिक अनुष्ठानों में इसीलिए अन्न का बड़ा महत्व बताया है। वैसे आजकल अनुष्ठानों की बनावट जटिल লভী है और आयोजनों की सजावट है। ऐसे में कम से कुटिल कम घर में तो अन्न देवता का मान करें।  n -   73 साथ भोजन करने से शांति वप्रेम का माहोल बनता है जीवन में अशांति आने के अनेक रास्ते हैं पर शांति के मार्ग सीमित 8| उनमें से एक है- भोजन। अन्न भी हमें बहुत शांति पहुंचा सकता |5` का संबंध तीन बातों से हैं- बनाना, परोसना, खाना। और यदि ये ठीक हों तो पचाना आसान है। अन्न की ये तीनों प्रक्रियाएं मनुष्य को शांत कर सकती हैं। अब तो मनोवैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि साथ बैठकर जो लोग भोजन करते हैं उनके परिवारों में शांति और प्रेम का वातावरण बनता ही है। नए प्रयोग इस बात के हो रहे हैं- जिसको वेल बीइंग थ्रू कुकिंग कहते हैं- कि यदि कोई एकन्दो सदस्य भोजन बना रहे हों तो दो-चार को और उसमें जुट जाना चाहिए। बनते हुए भोजन को जितने हाथों का साथ मिलेगा , भोजन में उतना ही आनंद आएगा। आज एकल खाने की वृत्ति बढ गई है। लेकिन सिंगल डाइनर्स आगे जाकर अपने को अशांत पाएंगे। हमारे यहां सभी धार्मिक अनुष्ठानों में इसीलिए अन्न का बड़ा महत्व बताया है। वैसे आजकल अनुष्ठानों की बनावट जटिल লভী है और आयोजनों की सजावट है। ऐसे में कम से कुटिल कम घर में तो अन्न देवता का मान करें।  n - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - संपादळीय कानून ऐसे हों, जो धरातल पर अमल में लाए जा सकें शिक्षा और खाद्य सुरक्षा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अलग-्अलग समय और रास्तों से मौलिक अधिकार तोबने लेकिन क्या इनका वास्तविक 4 लाभ आम नागरिकों को मिला? शिक्षा महंगी और निजी हाथों जाती रही जबकि खाद्य सुरक्षा कुछ किलो मुफ्त अनाज तक सीमित हो गई। वर्तमान सरकार मनरेगा के बाद इन दोनों कानूनों में बदलाव लाकर इन्हें समयबद्ध तरीके से अमल मेँ लाना चाहती है। हाल ही मेंँ सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि समानता ೫ से शुरू होती है। कोर्ट स्कूलों फैसले के बाद ही २००२ में संविधान संशोधन करके शिक्षा एक मौलिक अधिकार बनाने के लिए अनुच्छेद २१(अ ) जोड़ा गया २००१ में शिक्षा का अधिकार कानून आया। खाद्य सुरक्षा को कोर्ट ने जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग माना और यूपीए ಪಕ್ २०१३ में इसे कानूनी जामा पहनाया। लेकिन क्या वास्तव में गरीब का बच्चा आज वही शिक्षा पा रहा है, जो किसी उच्च वर्ग बच्चे को मिल रही है ? क्या यह सच नहीं कि आज भी कुपोषण ಕಕೆ के लिए बड़ी समस्या है और ননল मुफ्त अनाज इसका हल है? सरकार का मानना है कि इन कानूनों में बदलाव करके सबके लिए सुलभ कराने का समयबद्ध खाका होना चाहिए। ஈ क्रियान्वयन की रियल टाइम मॉनिटरिंग डिजिटल प्रक्रिया से हो। तीसरा, योजना भले सबके लिए हो लेकिन उससे कामूना ऐिसे वाले लोगों को प्राथमिकता से चिह्नित किया जाए। कानून चाहिए, जिन्हें अमल में लाना राज्यसत्ता के लिए बाध्यकारी होे। संपादळीय कानून ऐसे हों, जो धरातल पर अमल में लाए जा सकें शिक्षा और खाद्य सुरक्षा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अलग-्अलग समय और रास्तों से मौलिक अधिकार तोबने लेकिन क्या इनका वास्तविक 4 लाभ आम नागरिकों को मिला? शिक्षा महंगी और निजी हाथों जाती रही जबकि खाद्य सुरक्षा कुछ किलो मुफ्त अनाज तक सीमित हो गई। वर्तमान सरकार मनरेगा के बाद इन दोनों कानूनों में बदलाव लाकर इन्हें समयबद्ध तरीके से अमल मेँ लाना चाहती है। हाल ही मेंँ सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि समानता ೫ से शुरू होती है। कोर्ट स्कूलों फैसले के बाद ही २००२ में संविधान संशोधन करके शिक्षा एक मौलिक अधिकार बनाने के लिए अनुच्छेद २१(अ ) जोड़ा गया २००१ में शिक्षा का अधिकार कानून आया। खाद्य सुरक्षा को कोर्ट ने जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग माना और यूपीए ಪಕ್ २०१३ में इसे कानूनी जामा पहनाया। लेकिन क्या वास्तव में गरीब का बच्चा आज वही शिक्षा पा रहा है, जो किसी उच्च वर्ग बच्चे को मिल रही है ? क्या यह सच नहीं कि आज भी कुपोषण ಕಕೆ के लिए बड़ी समस्या है और ননল मुफ्त अनाज इसका हल है? सरकार का मानना है कि इन कानूनों में बदलाव करके सबके लिए सुलभ कराने का समयबद्ध खाका होना चाहिए। ஈ क्रियान्वयन की रियल टाइम मॉनिटरिंग डिजिटल प्रक्रिया से हो। तीसरा, योजना भले सबके लिए हो लेकिन उससे कामूना ऐिसे वाले लोगों को प्राथमिकता से चिह्नित किया जाए। कानून चाहिए, जिन्हें अमल में लाना राज्यसत्ता के लिए बाध्यकारी होे। - ShareChat
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☝ मेरे विचार - C OTCLu प्रेरणा हमेशा खुश रहना ही सौँदर्य बढ़ाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है। चार्ल्स डिकेंस ~ C OTCLu प्रेरणा हमेशा खुश रहना ही सौँदर्य बढ़ाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है। चार्ल्स डिकेंस ~ - ShareChat
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☝ मेरे विचार - द्रविड़ राजनीति में उभर रहया है एक नया त्रिकोणीय संघर्ष वैसे तो तमिलनाडु में कई साल से द्रमुक मैदान  में होती है। के सामने अन्नाद्रमुक मुकाबला इन दो द्रविड़ पार्टियों में ही होता है। लेकिन आज इनके पास ٦٨٢ लोकप्रिय নম্কী ৯ঁ নিভম সম ওল্ক कडी चुनौती मिल रही है। भाजपा कांग्रेस की नजरें इन समीकरणों पर हें। द्रविड़ राजनीति में उभर रहया है एक नया त्रिकोणीय संघर्ष वैसे तो तमिलनाडु में कई साल से द्रमुक मैदान  में होती है। के सामने अन्नाद्रमुक मुकाबला इन दो द्रविड़ पार्टियों में ही होता है। लेकिन आज इनके पास ٦٨٢ लोकप्रिय নম্কী ৯ঁ নিভম সম ওল্ক कडी चुनौती मिल रही है। भाजपा कांग्रेस की नजरें इन समीकरणों पर हें। - ShareChat
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☝ मेरे विचार - सुनील जैन भावनात्मक मुद्दे चुनाव जिता सकते हैं लेकिन विकास के ब्लू प्रिंट में उस मतदाता की परवाह तो कीजिए जो आपको जिताएगा। अगर जीडीपी  6 रही है और लोगों का स्वास्थ्य व खुशहाली नहीं, तो वह विकास एक धोखा है। सुनील जैन भावनात्मक मुद्दे चुनाव जिता सकते हैं लेकिन विकास के ब्लू प्रिंट में उस मतदाता की परवाह तो कीजिए जो आपको जिताएगा। अगर जीडीपी  6 रही है और लोगों का स्वास्थ्य व खुशहाली नहीं, तो वह विकास एक धोखा है। - ShareChat
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☝ मेरे विचार - जैन सुनोल एआई के विस्तार और गति से इस भरोसे को चुनौती मिल रही है कि तकनीकी इनोवेशंस हमेशा जितनी नौकरियां खत्म करते हैँ उससे अधिक पैदा करते हैं। इसके उलट आज एआई पूरे के पूरे पेशों को ही खत्म कर रहा है। जैन सुनोल एआई के विस्तार और गति से इस भरोसे को चुनौती मिल रही है कि तकनीकी इनोवेशंस हमेशा जितनी नौकरियां खत्म करते हैँ उससे अधिक पैदा करते हैं। इसके उलट आज एआई पूरे के पूरे पेशों को ही खत्म कर रहा है। - ShareChat
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