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।। ॐ ।। पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति। तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः॥ भक्ति का आरम्भ यहीं से है कि पत्र, पुष्प, फल, जल इत्यादि जो कोई मुझे भक्तिपूर्वक अर्पित करता है, मन से अर्पण करनेवाले उस भक्त का वह सब मैं खाता हूँ अर्थात् स्वीकार करता हूँ। #❤️जीवन की सीख #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #यथार्थ गीता #🙏गीता ज्ञान🛕
❤️जीवन की सीख - 3 || I पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति। तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः।।  यहीं से है कि पत्र पुष्प, भाक्त का आरम्भ फल, जल इत्यादि जो कोई मुझे भक्तिपूर्वक 3ণিন কনো ৪, সন ম 3পতা কনেনাল ওম भक्त का वह सब मैं खाता हूँ अर्थात् स्वीकार करता हूँ 3 || I पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति। तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः।।  यहीं से है कि पत्र पुष्प, भाक्त का आरम्भ फल, जल इत्यादि जो कोई मुझे भक्तिपूर्वक 3ণিন কনো ৪, সন ম 3পতা কনেনাল ওম भक्त का वह सब मैं खाता हूँ अर्थात् स्वीकार करता हूँ - ShareChat