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#☝ मेरे विचार #betikadrd
☝ मेरे विचार - मंडप में बैठी थी तो किसी की बुआ किसी की दीदी किसी की मौसी॰ किसी की प्रेमिका. और सबसे बढ़कर पापा की छोटी सी बेटी थी। हँसी भी थी॰ शोर भी था कहीं चुप-चुप सा था.. पर दिल जब फेरे लेकर उठी किसी की बहू तो किसी की पत्नी किसी की भाभी, किसी की चाची बन गई. और उसी भीड़ में खड़े खड़े मैंने खुद ' देखा. को बदलते उस पल समझ आया- कि विदाई सिर्फ घर की नहीं होती की भी होती है. बचपन और मैं. अपना एक हिस्सा वहीं छोड़ आई. Poetrynook_4es मंडप में बैठी थी तो किसी की बुआ किसी की दीदी किसी की मौसी॰ किसी की प्रेमिका. और सबसे बढ़कर पापा की छोटी सी बेटी थी। हँसी भी थी॰ शोर भी था कहीं चुप-चुप सा था.. पर दिल जब फेरे लेकर उठी किसी की बहू तो किसी की पत्नी किसी की भाभी, किसी की चाची बन गई. और उसी भीड़ में खड़े खड़े मैंने खुद ' देखा. को बदलते उस पल समझ आया- कि विदाई सिर्फ घर की नहीं होती की भी होती है. बचपन और मैं. अपना एक हिस्सा वहीं छोड़ आई. Poetrynook_4es - ShareChat