sn vyas
🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏
🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से🙏
#भाग_३२/१
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🦚ज्ञान क्यों नहीं होता है ?
*संसार में जब तक आसक्ति है , तब तक ज्ञान प्राप्त नहीं होता है । ज्ञान मार्ग में देह, धन, वैभव, माता-पिता , स्त्री पुत्र आदि से आसक्ति छोड़नी पड़ती है । शास्त्र और संत कहते हैं कि पूर्व जन्म के माता-पिता ,, स्त्री पुत्र आदि को जैसे आप " अज्ञानता " के कारण भूल गए हैं , वैसे ही इस जन्म के माता-पिता ,, स्त्री पुत्र आदि को "ज्ञान " के द्वारा भूल जाओ।*
*पिछले अनेक जन्मों के माता-पिता ,, स्त्री पुत्र आदि को आप अज्ञानता से भूल गए हैं , यह भगवान की आप पर कृपा मानी जाएगी । यदि ऐसा नहीं होता तो आप अपने पिछले जन्म के संबंधियों को अभी तक जानते पहचानते होते और रास्ते में जा रहे गधे को भी गले लगा लेते ,, " कि यह मेरा चाचा है ,, यह मेरा मामा है " पिछले जन्म की आपकी पत्नी अब कुतिया या गधी के अवतार में होती तो आप उसे अपने घर ले आते और यह चिंता की बात होती।*
*किंतु भगवान की अत्यंत कृपा ही है कि आप अपने गत जन्म के संबंधियों को अज्ञानता के कारण भूल गए हैं, तो अच्छा ही हुआ । जिस तरह आप अपने पिछले जन्म के माता पिता ,, स्त्री पुत्र आदि को अज्ञानता के कारण भूल गए हैं ,,, उसी तरह इस जन्म के माता-पिता ,, स्त्री पुत्र आदि को भी ज्ञान द्वारा भूल जाओ।*
*आप संसार से आसक्ति जैसे-जैसे घटाते जाएंगे,, वैसे-वैसे आत्मा पर प्रकाश पड़ने लगेगा।*
*🦚 आप कभी ज्ञान लेने गए हैं ?*
*हम लोग सही अर्थ में ज्ञान प्राप्त करने के लिए जाते ही नहीं है । हम लोग डोंगरे जी महाराज ,, कृष्ण शंकर शास्त्री जी ,, अथवा शंभू महाराज के भागवत सप्ताह में कई बार जाते होंगे । सन्यास आश्रम में भी कदाचित प्रतिदिन धक्के खाते होंगे , किंतु वहां भी वास्तव में ज्ञान लेने के लिए नहीं जाते हैं । बल्कि केवल दिखावे के लिए या मनोरंजन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए ही जाते हैं । मन तो घर में स्त्री पुत्र आदि के जंजाल में ही फंसा रहता है, फिर हमें ज्ञान कैसे मिल सकता है ?*
*आप बाजार में गेहूं लेने जाते हैं , किंतु बोरी लिए बिना जाएंगे तो व्यापारी समझ जाएगा कि यह व्यक्ति गेहूं लेने के लिए नहीं आया है , मात्र भाव - ताल पूछने के लिए ही आया है । इसलिए यदि बाजार में गेहूं का भाव किलो का तीस रुपये होगा तो व्यापारी आपको अट्ठाइस रुपए ही भाव बताएगा ।*
*क्योंकि वह जानता है कि यह व्यक्ति वास्तव में गेहूं लेने के लिए आया ही नहीं है । इसके बाद आप अन्य चार पांच दुकानों पर भाव पूछेंगे तो वहां आपको तीस रुपए भाव बताया जाएगा । आपको विश्वास हो जाएगा कि पहले व्यापारी के यहां उचित भाव में गेहूं मिलता है ।*
*जब आप एक हफ्ते बाद हाथ में बोरी लेकर गेहूं खरीदने के लिए उस व्यापारी के पास जाएंगे । तब वह समझ जाएगा कि आप वास्तव में गेहूं खरीदने के लिए आए हैं। इसलिए अब आपको बत्तीस रुपए का भाव बताएगा ।*
*यदि आप पूछेंगे कि -- क्यों भाई पहले तो आपने अट्ठाइस रुपए का भाव बताया था और अब बत्तीस रुपए क्यों मांग रहे हैं ? तो वह व्यापारी मुस्कुराते हुए सम्मान के साथ आपको जवाब देगा कि " भाई अट्ठाइस रुपए वाला गेहूं बिक चुका है और अब तीन-चार दिन से माल के अभाव में भाव बढ़ गया है ।" तब आप पहले के विश्वास के प्रभावित होकर दो रुपए ज्यादा देकर गेहूं खरीद लेंगे और ठगे जाएंगे।*
क्रमश: आ #कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta गे भाग कल पढेगे ✍🏽