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#पूजन विधि
पूजन विधि - वैशाख शुक्ल द्वादशी व्रत पूजा विधि नारदपुराण में प्राप्त विधान के अनुसार वैशाख शुक्ल द्वादशी को हुये श्रद्धापूर्वक देवेश्वर भगवान मधुसूदन को कलश उपवास करते परिमित दुग्ध से स्नान करायें तथा रात्रिकाल में तीन समय पूजन करते हुये जागरण करें । भगवान मधुसूदन की विधिवत् पूजा अर्चना करके निम्नोक्त मन्त्र से एक सौ आठ का हवन करें - आहुतियों  नमस्ते मधुहन्त्रे च नमस्ते पुष्करेक्षण।  कैटभघ्न नमस्तेडस्तु सुब्रह्मण्य नमोडस्तु ते।l भावार्थ - हे मधु नामक दैत्य का वध करने वाले प्रभो, आपको है! हे कमलनेत्र प्रभो, आपको नमस्कार है! हे कैटभ नामक নম্ায दैत्य का नाश करने वाले स्वामी, आपको नमस्कार है! हे परम शुद्ध एवं सर्वमङ्गलमय भगवन् आपको मेरा बारम्बार नमस्कार है। अपनी सामर्थ्यानुसार घी का उपयोग करें । इस प्रकार उपरोक्त विधि के से मनुष्य अनुसार वैशाख शुक्ल द्वादशी का व्रत करने पापमुक्त हो यज्ञों का फल प्राप्त होता है। जाता है तथा उसे आठ చrante  वैशाख शुक्ल द्वादशी व्रत पूजा विधि नारदपुराण में प्राप्त विधान के अनुसार वैशाख शुक्ल द्वादशी को हुये श्रद्धापूर्वक देवेश्वर भगवान मधुसूदन को कलश उपवास करते परिमित दुग्ध से स्नान करायें तथा रात्रिकाल में तीन समय पूजन करते हुये जागरण करें । भगवान मधुसूदन की विधिवत् पूजा अर्चना करके निम्नोक्त मन्त्र से एक सौ आठ का हवन करें - आहुतियों  नमस्ते मधुहन्त्रे च नमस्ते पुष्करेक्षण।  कैटभघ्न नमस्तेडस्तु सुब्रह्मण्य नमोडस्तु ते।l भावार्थ - हे मधु नामक दैत्य का वध करने वाले प्रभो, आपको है! हे कमलनेत्र प्रभो, आपको नमस्कार है! हे कैटभ नामक নম্ায दैत्य का नाश करने वाले स्वामी, आपको नमस्कार है! हे परम शुद्ध एवं सर्वमङ्गलमय भगवन् आपको मेरा बारम्बार नमस्कार है। अपनी सामर्थ्यानुसार घी का उपयोग करें । इस प्रकार उपरोक्त विधि के से मनुष्य अनुसार वैशाख शुक्ल द्वादशी का व्रत करने पापमुक्त हो यज्ञों का फल प्राप्त होता है। जाता है तथा उसे आठ చrante - ShareChat