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जलालुद्दीन रुमी का अनुवादित कलाम #सूफी काव्य
सूफी काव्य - "जलालुद्दीन रुमी का कलाम अनुवादित" किस रह से आया था यहाँ लौटूँ पडे़े हैं कितने काम दूर हो पल भर कू॰एन्यार मज़हब ए-' इश्क़ में है ये हराम इस गाँव में गर कोई है वल्लाह है वो शोख़ एन्तमाम चिड़िया क्या बच पाएगी सी-मुर्गों से भरा है दाम आवारा इधर को आ बैठ यहाँ अच्छा है मक़ाम खा ये गज़क जॉँ फ़ज़ा है ये ँग वो मय जो रखे क़िवाम बाक़ी सब कुछ रंग और नक़्श बाक़ी जंग और नंग और नाम चुप हो जा और ठीक से बैठ बे-ख़ुद ये है किनार ए-बाम App Want Motivational Videos "जलालुद्दीन रुमी का कलाम अनुवादित" किस रह से आया था यहाँ लौटूँ पडे़े हैं कितने काम दूर हो पल भर कू॰एन्यार मज़हब ए-' इश्क़ में है ये हराम इस गाँव में गर कोई है वल्लाह है वो शोख़ एन्तमाम चिड़िया क्या बच पाएगी सी-मुर्गों से भरा है दाम आवारा इधर को आ बैठ यहाँ अच्छा है मक़ाम खा ये गज़क जॉँ फ़ज़ा है ये ँग वो मय जो रखे क़िवाम बाक़ी सब कुछ रंग और नक़्श बाक़ी जंग और नंग और नाम चुप हो जा और ठीक से बैठ बे-ख़ुद ये है किनार ए-बाम App Want Motivational Videos - ShareChat