यह गीत सिखाता है कि अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे सुंदर माध्यम कला और संगीत है और जीवन की सच्ची शांति बाहरी दुनिया में नहीं बल्कि हमारे अंदर और ईश्वर में होती है। क्योंकि यह गीत कवि की गहरी भावनाओं और अंतर्मन की पीड़ा को व्यक्त करता है। कवि कहता है कि वह अपने दिल की बातों को सीधे शब्दों में नहीं कह पाता इसलिए उन्हें गीत और संगीत के माध्यम से प्रकट करता है। उसके भीतर बहुत दर्द संवेदनाएँ और अकेलापन है जिसे वह छुपाकर जीता है।गीत में दुनिया की सच्चाई भी दिखाई गई है जहाँ हर व्यक्ति धन दौलत और इच्छाओं के पीछे भाग रहा है लेकिन अंदर से सभी कहीं न कहीं दुखी हैं। इस भाग-दौड़ भरी दुनिया में सच्ची शांति मिलना कठिन है। यह एहसास होता है कि उसे सच्चा सहारा अपने भीतर और ईश्वर में मिलता है। जब भी वह ईश्वर को याद करता है, उसे शांति और संबल प्राप्त होता है। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, धीमी धीमी सी कोमल की आवाज में कहूं, #Dhimi Dhimi Si Komal Ki Aavaj Men Kahu,Writer ✍️ #Halendra Prasad

