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संकट मोचन पवनसुत, दीनन के रखवार: इस पंक्ति में हनुमानजी के कृपालु और रक्षक रूप की महिमा गाई गई है। 'पवनसुत' (पवन देव के पुत्र) हनुमानजी को 'संकट मोचन' कहा गया है, जिसका अर्थ है सभी प्रकार के कष्टों, दुखों और संकटों को हरने वाले। वे 'दीनन' यानी असहाय, गरीब, निर्बल और दुखी लोगों के सच्चे 'रखवार' (रक्षक और पालनहार) हैं। जो कोई भी जीवन की कठिनाइयों से परेशान होता है, हनुमानजी उसकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। जो शरणागत हो गया, उसका हो उद्धार: इस पंक्ति में शरणागति की महिमा बताई गई है। इसका अर्थ है कि जो भी व्यक्ति अपने अहंकार को त्यागकर, पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से हनुमानजी की शरण में आ जाता है (शरणागत हो जाता है), हनुमानजी उसका कल्याण करते हैं। वे न केवल उसके सांसारिक कष्टों को दूर करते हैं, बल्कि उसका 'उद्धार' (भवसागर से पार लगाना या मोक्ष प्रदान करना) भी कर देते हैं। मुख्य संदेश: यह दोहा हमें यह सीख देता है कि संकट के समय घबराने के बजाय हमें पूर्ण विश्वास के साथ ईश्वर की शरण में जाना चाहिए। हनुमानजी की भक्ति हर संकट से उबरने का सबसे सरल और अचूक मार्ग है। जय श्री राम #जय श्री राम #जय हनुमान
जय श्री राम - जय मारुती नंदन  '#= 554 4444 ష్లష్షష్షష్ట 55_ 770 3 5334 सुँकट मोचन पवनसुत, दीनन के खखवार! जो शरणागत हा गया, उसुका हा उद्धार । जय मारुती नंदन  '#= 554 4444 ష్లష్షష్షష్ట 55_ 770 3 5334 सुँकट मोचन पवनसुत, दीनन के खखवार! जो शरणागत हा गया, उसुका हा उद्धार । - ShareChat